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Bareilly News: आयुर्वेद में पंचकर्म केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की शुद्धि का भी माध्यम

Bareilly News: आयुर्वेद में पंचकर्म केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की शुद्धि का भी माध्यम


बरेली रूबरू बरेली। आयुर्वेद में पंचकर्म केवल शारीरिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की शुद्धि का भी माध्यम है। यह विचार “चिकित्सा  गुरु कुलम = 2025”  में वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में व्यक्त किया।  साथ ही त्वचा रोगियों में संशोधन चिकित्सा वमन कर्म एवं बंध्याकरण की समस्या में उत्तर बस्ती कर्म का भी प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। 

विश्व आयुर्वेद परिषद व रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में पंचकर्म एवं क्षारसूत्र विषय पर दो दिवसीय चिकित्सा गुरुकुलम कार्यशाला “चिकित्सा  गुरु कुलम = 2025” में दूसरे दिन पारंपरिक आयुर्वेद और आधुनिक शिक्षा का अद्भुत संगम दिखा।                                   
दूसरे दिन का शुभारंभ प्रातः आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेदा, नई दिल्ली के पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो. अनंत राम शर्मा ने किया। उन्होंने त्वचा रोगियों में संशोधन चिकित्सा वमन कर्म का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने स्वयं देखा कि कैसे शास्त्रीय विधियों को व्यवहारिक रूप से लागू किया जाता है।


इसके पश्चात प्रख्यात पंचकर्म विशेषज्ञ प्रो. उमा शंकर निगम ने पंचकर्म चिकित्सा की विभिन्न प्रमुख विधियों, स्नेहन, शिरोपिचु, शिरोधारा, उद्वर्तन, पत्र पिंड स्वेदन, जानू बस्ती, उरो बस्ती एवं कटि बस्ती का रोगियों पर लाइव प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को गहन अनुभव प्रदान किया। 

उनके इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि पंचकर्म केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि रोगी को संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करने का एक समग्र दृष्टिकोण है। द्वितीय सत्र में उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा के सैद्धांतिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि पंचकर्म केवल शारीरिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की शुद्धि का भी माध्यम है। 


उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों का धैर्यपूर्वक उत्तर दिया और प्रत्येक जिज्ञासा का समाधान कर कार्यक्रम को सार्थक बनाया।


इसके बाद जी. एस. आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, पिलखुआ से पधारीं प्रो. प्रतिभा सी. के. ने बंध्याकरण की समस्या में उत्तर बस्ती कर्म का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। 

उन्होंने विस्तार से बताया कि यह चिकित्सा स्त्री रोग संबंधी जटिलताओं को दूर करने में कितनी प्रभावी है और व्यावहारिक स्तर पर इसका प्रयोग किस प्रकार किया जाता है। 

पूरे दिन चले इन शैक्षणिक सत्रों ने प्रतिभागियों को पंचकर्म चिकित्सा की गहराई से समझ प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित आयुर्वेद के छात्र- छात्राओं, विशेषज्ञों और शिक्षकों ने माना कि यह आयोजन उनके ज्ञान-विस्तार और अनुभव दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।


कार्यक्रम का समापन पर उत्तर प्रदेश सरकार के वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने अपने संबोधन में आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाने और शोध आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति एवं कुलपति भी उपस्थित रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ा दी।


पूरे आयोजन में रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के छात्र- छात्राओं, शिक्षकों एवं स्टाफ के योगदान एवं सक्रिय भागीदारी से यह आयोजन सफल बन सका। निर्भय सक्सेना

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