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बरेली आई वी आर आई में दूध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण शिविर।

बरेली आई वी आर आई में दूध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण शिविर।


बरेली रूबरू बरेली। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है लेकिन किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता। आवश्यकता है कि किसान दूध का प्रसंस्करण कर पनीर, घी, फ्लेवर युक्त दूध जैसे उत्पाद तैयार कर अपनी आय में  वृद्धि करें।
                                                
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आई सी ए आर- आई वी आर आई), इज्जतनगर के पशु उत्पाद प्रौद्योगिकी प्रभाग (एल.पी.टी.) में अनुसूचित जाति उप- योजना के तहत किसानों के लिए “दूध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। 


इसमें 25 प्रतिभागी (05 पुरुष एवं 20 महिलाएं) भाग ले रहे हैं।जिसमें यह बात कही गई। 
इस शिविर का उद्घाटन प्रभागाध्यक्ष डॉ. अरूप रतन सेन ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। 

विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. पी. प्रभाकरण, विभागाध्यक्ष, एल.पी.टी., पंतनगर वेटेरिनरी कॉलेज उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कोर्स निदेशक डॉ. सागर चंद ने किया। इस अवसर पर डॉ. देवेंद्र कुमार एवं डॉ. सुमन तालुकदार सहित कई वैज्ञानिक मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. सेन ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, लेकिन किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता। यदि किसान दूध का प्रसंस्करण कर पनीर, घी, फ्लेवर युक्त दूध, दही और आइसक्रीम जैसे उत्पाद तैयार करें तो उनकी आय में कई गुना वृद्धि हो सकती है। उन्होंने किसानों से सीखी गई तकनीकों को अपने गाँवों और डेयरी व्यवसाय में अपनाने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रभाकरण ने कहा कि आज केवल उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद को प्रतिस्पर्धा योग्य बनाना आवश्यक है। दूध का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी साधन है और आधुनिक तकनीकें इसमें सहायक साबित होंगी।


कोर्स निदेशक डॉ. सागर चंद ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से दूध एवं दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण, गुणवत्ता मानक, खाद्य सुरक्षा और विपणन की जानकारी दी जाएगी। व्यावहारिक अभ्यास पर विशेष बल दिया जाएगा ताकि किसान स्वयं उत्पाद तैयार कर सकें।


संस्थान के वैज्ञानिकों ने आश्वस्त किया कि प्रशिक्षण के बाद भी किसानों को तकनीकी सहयोग मिलता रहेगा। यह कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। निर्भय सक्सेना

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