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विकास का रोडमैप बनेगा नाथ नगरी की पहचान। प्रधानमंत्री पुरस्कार दौड़ में 513 जिलों की रेस में बरेली टाप 40 में आया।

विकास का रोडमैप बनेगा नाथ नगरी की पहचान। प्रधानमंत्री पुरस्कार दौड़ में 513 जिलों की रेस में बरेली टाप 40 में आया।


धरातल पर उतरी योजनाओं की दिल्ली तक गूंज, समग्र विकास के दम पर पुरस्कार की रेस में बरेली

बरेली रूबरू बरेली। नाथनगरी केवल दावा नहीं, काम के दम पर अब अपनी पहचान बना रही है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह की कुशल नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक दक्षता, मेहनत और टीम मैनेजमेंट की वजह से नाथनगरी बरेली एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रशासनिक दक्षता और विकास की रफ्तार से पहचान बनाई है।


प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार- 2025 की समग्र जिला विकास श्रेणी में बरेली जिले का चयन स्क्रीनिंग स्तर पर किया गया है। जिले में बुनियादी सुविधाओं से लेकर सामाजिक, सांस्कृतिक और रोजगारोन्मुख पर्यटन योजनाओं में हुये व्यापक बदलाव की वजह से यह उपलब्धि हासिल हुई है। योजना में देश भर के 513 जिलों से प्राप्त आवेदनों में से केवल 40 जिलों को इस प्रतिष्ठित श्रेणी में चुना गया है। 


उत्तर प्रदेश से बरेली, हमीरपुर, हाथरस और संभल को अवसर मिला है। यह चयन यूं ही नहीं हुआ। इसके पीछे जिले में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार और निगरानी बड़ी वजह रही है।


प्रधानमंत्री पुरस्कार की श्रेणी में जिले का मूल्यांकन हर घर जल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण- शहरी), आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष, पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा, सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी 11 प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर किया गया है। 


बरेली में इन योजनाओं को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इन्हें लाभार्थियों तक पहुंचाने पर फोकस रहा। पेयजल आपूर्ति, आवास, स्वास्थ्य सुरक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वरोजगार और ऊर्जा जैसी जरूरतों में जिले ने संतुलित प्रगति दिखाई है।


बरेली जिले में विकास कार्यों को गति देने में जिलाधिकारी अविनाश सिंह की सक्रिय भूमिका रही है। योजनाओं की नियमित समीक्षा, फील्ड विजिट, लंबित मामलों पर सख्ती और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से बरेली ने कई मोर्चों पर बढ़त बनाई। 


चाहे ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति, शहरी-ग्रामीण आवास, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, स्ट्रीट वेंडरों का पुनर्वास, आंगनबाड़ी केंद्रों का सशक्तिकरण हो या फिर किसानों और कारीगरों को आर्थिक संबल। हर स्तर पर जिले का प्रयास दिल्ली तक गूंजा है। इसके अलावा पर्यटन की दृष्टि से महाभारत कालीन लीलौर झील सौंदर्यीकरण समेत नाथ नगरी में कई विकास कार्य हुये हैं जिससे बरेली की पहचान वैश्विक पटल पर हुई है।


बरेली के सामने अगला और निर्णायक चरण है। 21 जनवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुतीकरण होगा। जिला प्रशासन को 15 मिनट में अपने कामकाज का खाका रखना है। 



10 मिनट प्रेजेंटेशन और 5 मिनट सवाल-जवाब को दिए जाएंगे। उक्त समय में गवर्नेंस, क्वांटिटेटिव और क्वालिटेटिव पैरामीटर के साथ-साथ जिले में अपनाए गए नवाचार और जमीनी बदलाव को सामने रखा जाएगा।


प्रशासनिक विशेषज्ञों की मानें तो यदि बरेली अंतिम चरण में सफल होता है तो यह न सिर्फ जिले बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए सुशासन और विकास का उदाहरण बनेगा। प्रधानमंत्री पुरस्कार मिलना किसी जिले के लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि उसकी नीतिगत सोच और धरातल पर किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्वीकृति माना जाता है। 


अब जिले की निगाहें 21 जनवरी पर टिकी हैं। दिल्ली की इस कसौटी पर बरेली जिस आत्मविश्वास से उतरने जा रहा है, उसने पहले ही साफ कर दिया है। 
निर्भय सक्सेना

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