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रमजान की रौनकें बढ़ाने में महिलाओं की अहम भूमिका - सलमान मिया

रमजान की रौनकें बढ़ाने में महिलाओं की अहम भूमिका - सलमान मिया

बरेली रूबरू बरेली।  रमजान का चाँद नज़र आते ही मुस्लिम के दिलो-दिमाग में एक रूहानी खुशी छा जाती है, ख्यालों में पाकी लहर दौड़ जाती है, हर दिन ईद और हर रात शबे-बरात के मनमोहक नजारे पेश करते हैं, रोज़ेदारों के लिए सुबहो-शाम सुगंधित शर्बत और स्वादिष्ट भोजन का प्रबंध होता है I 

इस महीने में महिलाएं पुरुषों की तरह ही रोज़ा रखती हैं और करीब दो बजे दिन से ही इफ्तार की तैयारीयों में लग जाती हैं और रात ग्यारह बजे तक लगातार व्यस्त रहती हैं, फिर ढ़ाई तीन बजे रात से सहरी की तैयारियों में जुट जाती हैं, इस दौरान वह ख़ुद मुश्किल से सहरी व इफ्तार कर पाती हैं, सहरी और फज्र के बाद बच्चों को तैयार करके उन्हें नाश्ता और लंच देकर स्कूल भेजने के बाद घर की साफ सफाई करते-करते दिन के नौ दस बज जाते हैं जिस के कारण उन्हें सोने और आराम के लिए मुश्किल से तीन-चार घंटे ही मिल पाते हैं, लेकिन इन सब के बावजूद उनके माथे पर कोई शिकन नहीं आती, ये हर काम खुशी खुशी अंजाम देती हैं, इस दौरान मनपसंद खाने-पीने की वस्तुओं की फरमाइशें भी कम नहीं होतीं। उक्त बातें *जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष सलमान हसन खान (सलमान मिया)* ने कहीं I

उन्हों ने कहा कि जब औरतें शाम को रोज़ा दारों के सामने तरह-तरह की खाने-पीने की चीज़ों से सजे दस्तरख़ान लगाती हैं तो विभिन्न प्रकार के व्यंजनों की सुगंध उन्हें यह एहसास कराती है कि अल्लाह ने रोज़ा दारों के लिए आख़िर में तो बड़ा सवाब और सम्मान रखा ही है, इस दुनिया में भी कुछ कम नेअमतें नहीं आता फ़रमाई हैं, कुछ घंटों की भूख-प्यास सहन करने के बदले में इस तरह के दुर्लभ और सुगंधित व्यंजन की प्राप्ती निश्चित रूप से कोई घाटे का सौदा नहीं, उस समय रोजेदारों के चेहरों पर जो खुशी और संतोष नजर आता है वह अनमोल है जिसमें महिलाएं कुछ हद तक अहम भूमिका निभाती हैं, अल्लाह के प्यारे रसूल फरमाते हैं कि रोजेदारों के लिये दो खुशियाँ हैं, एक इफ्तार के वक्त और एक रब से मिलने के वक्त!

रमजान में आमतौर पर पुरुष रोज़े के कारण अपनी व्यस्तता कम कर देते हैं, जबकि महिलाओं की व्यस्तता दोगुनी हो जाती है, यदि औरतें भी रोज की परेशानियों का हवाला देकर अतिरिक्त व्यस्तता से बचने लगें तो हमारे दस्तरख़ान से तरह-तरह के खुशबूदार  और मनमोहक खास पकवानों  को ग़ायब होते देर नहीं लगेगी, इसलिए हम मर्दों का यह दायित्व बनता है कि हम उनके कामों में उनकी मदद करें, ताकि उन्हें थोड़ी राहत की सांस मिल सके, इससे उन्हें मदद तो मिलेगी ही, साथ ही मिया -बीवी के बीच प्यार और मोहब्बत भी बढ़ेगा, आपसी रिश्ते मजबूत होंगे, नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आम दिनों में भी घर के कामों में अपनी बीवियों की मदद करते थे, हम तो उनके गुलाम हैं हमें भी औरतों का हाथ बटाना चाहिए, नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह काम आम तौर पर हमारे लिए एक सीख है।

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