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Bareilly News: चौधरी तालाब में नाव मे भगवान राम को बैठाकर गंगा नदी पार कराने का हुआ सजीव मंचन।

Bareilly News: चौधरी तालाब में नाव मे भगवान राम को बैठाकर गंगा नदी पार कराने का हुआ सजीव मंचन।


बरेली रूबरू बरेली। चौधरी मोहल्ला में चल रही श्रीरामलीला में गंगा पार का मंचन चौधरी तालाब के अंदर नाव मे प्रभु राम सीता को बैठाकर गंगा नदी पार कराने का सजीव मंचन दिखाकर रामलीला कराई गई। रामलीला में कुछ मार्मिक प्रसंगों का भी मंचन हुआ जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। गंगा पार की लीला का शुभारंभ बरेली जिला बार के पूर्व अध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने आरती उतार कर किया।

श्री रानी महालक्ष्मीबाई रामलीला समिति (रजि.) की 458 वर्ष पुरानी चौधरी तालाब रामलीला में गंगा नदी पार की अद्भुत लीला, वनगमन के समय प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी गंगा तट पर पहुंचे। प्रभु ने गंगा मैया का स्मरण कर उनके महात्म्य का बखान किया। इसके बाद भक्तिभाव से ओतप्रोत केवट प्रसंग का मंचन हुआ।

भगवान राम ने केवट से नाव पार कराने का आग्रह किया। केवट बोला “नाथ! आपके चरणों की धूल तो पत्थरों को भी तर कर देती है। यदि मेरी नाव पर यह धूल लग गई तो यह भी मनुष्य बन जाएगी और मेरा परिवार बेरोजगार हो जाएगा। पहले मैं आपके चरण धोऊंगा, फिर नाव पार कराऊंगा।”

यह संवाद सुनकर पूरा मैदान “हर-हर गंगे” और “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष से गूंज उठा।
केवट ने प्रभु राम के चरण पखारे, चरणामृत को माथे से लगाया और परिवार सहित उसका पान किया। फिर उसने प्रभु राम , सीता व लक्ष्मण को नाव में बैठाकर गंगा नदी पार कराई। यह दृश्य प्रेम, भक्ति और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण बनकर उपस्थित जनसमूह को आंसुओं से भिगो गया। भारद्वाज मुनि संवाद गंगा पार करने के उपरांत प्रभु भारद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचे। वहां प्रभु ने मुनि को प्रणाम किया। मुनि ने प्रभु को आशीर्वाद देते हुए उन्हें आगे चित्रकूट जाकर निवास करने का उपदेश दिया। इस प्रसंग ने गुरु-शिष्य परंपरा और धर्म परायणता का संदेश दिया। 

रामलीला का सबसे भावुक दृश्य राम- भरत मिलन रहा। अयोध्या से चित्रकूट पहुंचे भरत प्रभु राम के चरणों में गिर पड़े और रोते हुए अयोध्या लौटकर राजगद्दी स्वीकारने से मना कर दिया। इस भावनात्मक दृश्य ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और पूरा मैदान “भरत-राम की जय” के नारों से गूंज उठा।

इसके बाद जयंत की कुटिलता का मंचन हुआ, जिसमें वह मायावी रूप धारण कर माता सीता के चरण में काँटा चुभाता है। प्रभु श्रीराम उसकी आंख फोड़कर दंडित करते हैं। यह प्रसंग इस बात का प्रतीक रहा कि अधर्म और कुटिलता का अंत निश्चित है।


वन के मार्ग में आगे बढ़ते हुए प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी महर्षि अत्रि और उनकी धर्मपत्नी माता अनसूया से मिले। माता अनसूया ने माता सीता को स्त्री धर्म और पतिव्रता धर्म का उपदेश दिया। इस प्रसंग ने दर्शकों को नारी धर्म, आदर्श और मर्यादा का संदेश प्रदान किया। 


समिति के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्रा ने बताया कि यह लीला संपूर्ण भारत मे एक मात्र ऐसी रामलीला है जिसमे गंगा पार का मंचन चौधरी तालाब के अंदर नाव मे बैठ कर गंगा नदी पार कराकर सजीव मंचन दिखाकर लीला संपन्न कराई जाती है। समिति के अध्यक्ष पं. रामगोपाल मिश्रा, हरीश शुक्ला, घनश्याम मिश्रा, प्रदीप बाजपेयी, नीरज शुक्ला, शिव नारायण दीक्षित, श्रेयांश बाजपेयी, धीरेंद्र शुक्ला, बृजेश प्रताप सिंह, आदित्य शुक्ला, शशिकांत गौतम, विनोद राजपूत, यश चौधरी, आकाश गंगवार, शिवम वर्मा, प्रतीक अरोड़ा आदि उपस्थित रहे। निर्भय सक्सेना

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