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बरेली चौधरी तालाब रामलीला मेले में जानकी जन्म, ऋषि मुनियों द्वारा यज्ञ, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा ताड़का वध का हुआ मंचन।

बरेली चौधरी तालाब रामलीला मेले में जानकी जन्म, ऋषि मुनियों द्वारा यज्ञ, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा ताड़का वध का हुआ मंचन।



बरेली रूबरू बरेली। चौधरी तालाब स्थित रामलीला मैदान पर जानकी जन्म, ऋषि मुनियों द्वारा यज्ञ, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा ताड़का वध एवं अहिल्या उद्धार की लीलाओं का मंचन भैरव बाबा रामलीला मंडल अयोध्या धाम के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया।


एक बार अत्याचारी रावण ऋषि मुनियों का रक्त एक घड़े में एकत्रित कर रहा था। रक्त एकत्रित करते समय ऋषियों ने रावण को श्राप दिया की ऋषियों का यह रक्त जहां भी गिरेगा वहां अकाल सूखा पड़ेगा। ऋषियों का यह श्राप सुनकर रावण उनके रक्त को एक घड़े मे भरकर राजा जनक के खेतों में गढ़वा दिया। 

श्रापित रक्त का घड़ा गढ़ा होने के कारण जनकपुर में सुखा पड़ने पर अकाल पड़ गया । वहां की जनता भूख प्यास से तड़पने लगी है और धीरे-धीरे मृत्यु को प्राप्त होने लगी राजा जनक बहुत ही दुखी हुए तो उन्होंने पुरोहितों से इसका उपाय पूछा तो पुरोहितों द्वारा बताया गया कि राजा जनक और उनकी रानी सुनैना दोनों मिलकर खेतों में हल चलाएं तो वर्षा होगी। राजा जनक ने इस बात को मानते हुए अपनी रानी सुनैना के साथ अपने खेतों में हल चलाया।


हल चलते- चलते उसी रक्त के घड़े से टकराकर हल वही रुक गया। गड्ढे को खोदकर जब घड़े को निकाला गया तो उसमें से एक सुंदर कन्या निकली। राजा जनक ने उस कन्या को ईश्वरीय आशीर्वाद मानकर अपना लिया। 

इस प्रकार पृथ्वी से जन्मी इस कन्या का नाम सीता रखा गया कन्या प्राप्त होते ही जनकपुर में घनघोर वर्षा होने लगी राज्य अकाल से मुक्त हो गया, लोग मंगल गीत गाते हुए झूमने लगे। इधर राम लक्ष्मण द्वारा किसी विश्वामित्र के यज्ञ को पूर्ण कराया गया यज्ञ पूर्ण कराने के पश्चात ऋषि विश्वामित्र राम लक्ष्मण के साथ जनकपुर की ओर सीता स्वयंवर हेतु प्रस्थान करने लगे रास्ते में एक सुनसान उजाड़ आश्रम आया। 


श्री राम ने देखा आश्रम को देखकर उन्होंने विश्वामित्र जी से पूछा हे गुरुदेव यह आश्रम किसका है और वहां पर पत्थर की शिला है वह क्यों है विश्वामित्र ने श्री राम को बताया यह आश्रम गौतम ऋषि का है और वह जो उनके द्वार पर पत्थर की शीला है वह उनके द्वारा श्रापित उनकी पत्नी अहिल्या जी की है जो आपकी राह निहार रही है हे राम अहिल्या को स्पर्श कर उनका उद्धार कीजिए, गुरु का आदेश मानकर श्री राम ने अहिल्या को अपने चरण से स्पर्श किया जिसमें अहिल्या पुनः स्त्री बनकर अपने पति लोक को चली गयी। इस प्रकार भगवान श्री राम ने अहिल्या जी का उद्धार किया। 


समिति के अध्यक्ष पं. रामगोपाल मिश्रा, हरीश शुक्ला, घनश्याम मिश्रा, प्रदीप बाजपेयी, नीरज शुक्ला, श्री नारायण दीक्षित, श्रेयांश बाजपेयी, धीरेंद्र शुक्ला, मंत्री बृजेश प्रताप सिंह, आदित्य शुक्ला, शशिकांत गौतम, विनोद राजपूत, यश चौधरी, प्रबंधक आकाश गंगवार, शिवम वर्मा, प्रतीक अरोड़ा आदि उपस्थित रहे। निर्भय सक्सेना

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