मध्य प्रदेश के रीवा में साहित्य परिषद के 28 प्रांतो से आए 22 भाषाओं के 1086 साहित्यकारों ने किया प्रतिभाग
बरेली रूबरू बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद का तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर रीवा में हुआ। इस राष्ट्रीय अधिवेशन में 28 प्रांतो से आए 22 भाषाओं के 1086 साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया । बरेली के भी 6 साहित्य से जुड़े लोग इसमें शामिल हुए।
कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम के सभागार मे हुए इस 17 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में आत्मवोध से विश्ववोध मुख्य विषय रहा । इसकी मुख्य विशेषता यह रही कि इसमें भारत की भाषाई विविधता और राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में उसकी अद्भुत एकता का सुखद दृश्य देखने को मिला।
तीन दिन तक चले इस अधिवेशन में कुल मिलाकर सात सत्रों में देश के कोने - कोने से आए साहित्यकारों ने साहित्य के विविध पहलुओं पर गहन चिंतन, मंथन एवं आपस में विमर्श किया ।
ब्रज प्रान्त के प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा, जनपदीय संरक्षक बरेली प्रो के ए वार्ष्णेय, उमेश गुप्ता, निर्भय सक्सेना, प्रमोद मिश्रा एवं गंगाराम पाल ने साहित्य परिषद के रीवा अधिवेशन में प्रतिभाग किया ।
इन साहित्यकारों शामिल रहे । उमेश चन्द्र गुप्ता ने पांचवे सत्र के प्रारंभ में परिषद के ध्येय गीत की ह्र्दय स्पर्शी प्रस्तुति कर बरेली का गौरव बढ़ाया । इस अवसर पर निर्भय सक्सेना की पुस्तक कलम बरेली की =5 का विमोचन भी राष्ट्रीय महामंत्री पवन पुत्र बादल एवं प्रांत अध्यक्ष सुरेश बाबू मिश्रा की उपस्थिति में अतिथियों द्वारा किया गया।
अधिवेशन के समापन सत्र से पूर्व साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मन्त्री श्रीधर पराड़कर ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश हरदोई के बरिष्ठ साहित्यकार सुशील चन्द्र त्रिवेदी मधुपेश को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महामन्त्री का दायित्व उत्तर प्रदेश के बरिष्ठ साहित्यकार एवं राष्ट्रधर्म मासिक के प्रबंध सम्पादक डाॅ पवन पुत्र बादल को सौंपा गया।
परिषद की नवीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुल मिलाकर 21 पदाधिकारी मनोनीत किए गए । विभिन्न प्रांतो से राष्ट्रीय कार्यकारणी के 11 कार्यकारिणी के सदस्यों की भी घोषणा की गई । निर्भय सक्सेना
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