Bareilly News: स्वतंत्रता समर के अल्पज्ञात बलिदानी" कृति का हुआ लोकार्पण। साहित्य सृजन से समाज में राष्ट्रीय भावना का संचार करें साहित्यकार"।
बरेली रूबरू बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रान्त बरेली के तत्वावधान में पुस्तक विमोचन एवं सारस्वत अभिनंदन समारोह का आयोजन साहित्य परिषद की प्रांतीय महामन्त्री डाॅ शशि बाला राठी द्वारा किया गया ।
शील नर्सिंग कालेज, कमुआ कला के ऑडिटोरियम में प्रथम चरण में कहानीकार डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा की कृति- "स्वतंत्रता समर के अल्पज्ञात बलिदानी" का लोकार्पण कार्यक्रम अध्यक्ष डाॅ सुशील चन्द्र त्रिवेदी मधुपेश, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ पवन पुत्र बादल राष्ट्रीय महामन्त्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद, डाॅ सी पी शर्मा, प्रोफेसर वलजीत सिंह, सौरभ त्रिपाठी, डाॅ ब्रजेश कुमार शर्मा, निर्भय सक्सेना, डाॅ अनिल मिश्रा एवं अतुल मिश्रा द्वारा किया गया ।
इससे पूर्व मोहन चन्द्र पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती बंदना, अनिल शर्मा द्वारा प्रस्तुत अभिनंदन गीत और उमेश चन्द्र गुप्ता द्वारा प्रस्तुत वन्देमातरम गीत से समारोह का शुभारम्भ हुआ ।
साहित्य परिषद के ब्रज प्रांत के प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि भारत माता को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए देश के छः लाख से अधिक नौजवानों ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया ,मगर हमारा इतिहास और सरकारें इस बारे में मौन हैं ।
इन बलिदानियों की गाथाएं हमारी वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचे यह प्रयास इस पुस्तक द्वारा करने का प्रयास किया गया है ।
बरिष्ठ साहित्यकार डाॅ अनिल मिश्रा पार्थ और इफको उप प्रबंधक तथा बरिष्ठ साहित्यकार अतुल मिश्रा द्वारा कृति स्वतंत्रता समर के अल्पज्ञात बलिदानी की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की । दोनों वक्ताओं ने कहा कि डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा का एक सार्थक प्रयास है और इसकी सराहना की जानी चाहिए।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महामन्त्री के प्रथम बार बरेली आगमन पर बरेली के प्रांतीय एवं जनपदीय पदाधिकारियों ने दोनों को फूल मालाओं से लाद दिया ।
सभी ने दोनों पदाधिकारियों को शाल उढ़ाकर, अभिनंदन पत्र, स्मृति चिन्ह तथा श्रीफल प्रदान कर उनका सारस्वत अभिनंदन किया ।
बरिष्ठ साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रो डाॅ विनीता सिंह ने राष्ट्रीय महामन्त्री के अभिनंदन पत्र का वाचन किया ।
मुख्य अतिथि डाॅ पवन पुत्र बादल ने अपने सम्बोधन में कहा कि साहित्य समाज को रचनात्मक दिशा देने का कार्य करता है । उन्होने कहा कि वर्तमान समय में हमारा देश विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है । ऐसे में साहित्यकारों का दायित्व और बढ़ जाता है ।
वह अपनी रचनाओं के द्वारा हमारी युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय भावना, कर्तव्य निष्ठा और देश प्रेम की भावना का संचार करें ।
उन्होने कहा कि बलिदानी क्रांतिकारियों पर लिखी गयी डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा की यह कृति निश्चित रूप से युवाओं को इस तथ्य से अवगत करायेगी कि अगणित बलिदानों के बाद यह स्वतंत्रता हमें मिली है ।
उन्होने कहा कि इस कृति की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी दो हजार से अधिक प्रतियां देश भर में बिक चुकी हैं ।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डाॅ सुशील चन्द्र त्रिवेदी मधुपेश ने कहा कि साहित्य परिषद से जुड़े साहित्यकार लोक कल्याणकारी साहित्य का सृजन करें । बे सृजन के माध्यम से समाज में परस्पर सहयोग, प्रेम ,भाईचारा ,राष्ट्रबोध और कर्तव्यबोध का संदेश देने का कार्य करने में अपनी ऊर्जा लगाएं । उन्होने कहा कि साहित्य परिषद राष्ट्रवादी साहित्यकारों का देश ब्यापी संगठन है और हमारे लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है ।
इस अवसर पर डाॅ ब्रजेश कुमार शर्मा, निर्भय सक्सेना, प्रमोद मिश्रा, निरुपमा अग्रवाल, डाॅ विनीता सिंह, अनिल शर्मा, मोहन चन्द्र पाण्डेय, उमेश त्रिगुणायत, गुरविंदर सिंह, विनोद कुमार गुप्ता, ओमप्रकाश अरोड़ा, मनीराम, डाॅ सी पी शर्मा, डाॅ रवि प्रकाश शर्मा, प्रवीण कुमार शर्मा, अनुज चौहान , विकास शर्मा, यशपाल, नर्सिंग कालेज के शिक्षक / शिक्षकाएं एवं बड़ी संख्या में नर्सिंग कालेज की छात्र / छात्राएं मौजूद रहे।
जनपदीय मंत्री विमलेश चंद्र दीक्षित ने सभी का आभार व्यक्त किया । निर्भय सक्सेना
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