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Bareilly News: गुरू तेग बहादुर की 350वीं शहीदी शताब्दी। सीस सस्कार दिवस पर गायन हुआ।

Bareilly News: गुरू तेग बहादुर की 350वीं शहीदी शताब्दी। सीस सस्कार दिवस पर गायन हुआ।

बरेली रूबरू बरेली। सीस सस्कार दिवस पर गुरुद्वारा गुरू गोबिन्द सिंह नगर माडल टाउन में सीस सस्कार कीर्तन दरबार में सुबह आसा की वार का कीर्तन भाई सतवंत सिंघ ने किया।

दिल्ली से आये प्रोफेसर सुखविंदर सिंह जी (हेड ग्रंथी गुरुद्वारा बाला साहिब) ने बताया कि नौवें पातशाह गुरू तेग बहादुर साहिब की शहादत ने हिंदुस्तान के लोगों में भी एक इंकलाब की अलख जगाई , जहां तीन सिक्खों भाई मती दास, भाई सती दास, भाई दयाला एवं गुरू तेग बहादुर जी की शहादत के बाद एक भी जनेऊ मुगल शासक औरंगजेब एवं उसके सिपाहसालर नहीं उतरवा सके वहीं गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर लोगों में भी क्रांति की लहर जाग्रत होने की संभावना हुई।

ऐतिहासिक घटना बताते हुए उन्होंने बताया कि भाई जैता जी को गुरू गोबिन्द सिंघ साहिब ने मुश्किल हालातों में भी सीस लेकर आने पर सीने से लगा कर कहा "रंगरेटा गुरू का बेटा" 
आज के ही दिन आनंदपुर साहिब में गुरू तेग बहादुर जी के सीस का सस्कार किया गया, जहाँ गुरुद्वारा सीसगंज साहिब सुशोभित है।


श्री दरबार साहिब से आये रागी भाई गुरमेल सिंघ जी ने गुरबाणी कीर्तन में गुरू गोबिन्द सिंघ साहिब द्वारा औरंगजेब को लिखे जफरनामे का गायन किया। इसी जफर नामे की चिठ्ठी को पढ़कर औरंगजेब को अपनी गलती का एहसास हुआ था। कि उसने ज़्यादती की।


  रात्रि के दीवान में ग्रंथी साहिब ने रहिरास साहिब का पाठ किया। हजूरी रागी भाई सतवंत सिंघ जी ने शबद चौंकी आरती के बाद गुरू तेग बहादुर साहिब द्वारा रचित बाणी सलोक महला ९ का कीर्तन किया। उनको संगत की ओर से भी गुरू की बखशीष प्रदान की गई।


प्रो सुखविंदर सिंह ने बताया कि जब गुरू गोबिन्द सिंघ जी ने सीस लाने वाले रंगरेटा जी से पूछा कि ग़ुरूपिता एवं सिक्खों की शहादत के समय क्या वहाँ कोई सिक्ख विरोध हेतु सामने नहीं आया, इस पर रंगरेटा जी ने बताया कि होगा भी तो डर के कारण कोई आगे नहीं आया। 


इस पर दशमेश पिता ने प्रण लिया था कि 
वर्ष 1699 को वैसाखी वाले दिन श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर खालसा पंथ की स्थापना की।
नानकपुरी साहिब से आये रागी भाई नाजर सिंह ने शबद
"सूरा सो पहिचानिये जो लरै दीन के हेत। पुरजा पुरजा कट मरै कबहूं न छाडै खेत" गायन किया एवं शबद
"पहिला मरण कबूल जीवन की छड आस, होहु सभना की रेणुका तउ आओ हमारै पास"
अरदास हुकुमनामे के बाद सारी संगत ने गुरू का लंगर ग्रहण किया।


संचालन महा सचिव गुरदीप सिंघ ने किया अध्यक्ष मालिक सिंघ कालड़ा ने सारी संगत का धन्यवाद किया।


कार्यक्रम में मुख्य सहयोग राजेंदर सिंह, मनदीप सिंह, बलविंदर सिंघ, गुरप्रीत सिंह, चंदरमोहन खन्ना,अमनदीप सिंघ, जसपाल सिंघ, गुरमीत सिंह हरविंदर सिंघ, गुर्दार्शन सिंह जसपाल सिंह आदि का रहा। निर्भय सक्सेना

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