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विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है सोशल मीडिया

विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है सोशल मीडिया


बरेली रूबरू बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रान्त, बरेली के तत्वावधान में "सोशल मीडिया और साहित्य" पर विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष साहित्य भूषण सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि तकनीक इस बदलते दौर में आज सोशल मीडिया विचारों की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बन गया है। 


 बरिष्ठ साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल के प्रभात नगर स्थित आवास पर हुई गोष्ठी में सुरेश बाबू मिश्र ने आगे कहा कि सोशल मीडिया का प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ रहा है । साहित्य भी इससे अछूता नहीं है । 


आज फेसबुक, ब्हाट्सप ,ट्विटर और इंस्टाग्राम पर हजारों साहित्यिक पटल संचालित हो रहे हैं । इन साहित्यिक पटलों से हमारे युवाओं की रुचि साहित्य की ओर तेजी से बढ़ रही है जो साहित्य के लिए एक सुखद संकेत है । 


उन्होने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्व समाज मे विद्वेष करने के उद्देश्य से नकारात्मक, भ्रामक और अश्लील पोस्ट डाल रहे हैं जो चिंताजनक है । उन्होने सोशल मीडिया पर इस प्रकार की नकारात्मक पोस्ट पर नियंत्रण के लिए प्रावधान बनाने की जरूरत बताई ।

कहानीकार निरुपमा अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय.में हम डिजिटल इण्डिया में रह रहे हैं इसलिए हमारा साहित्य भी आज डिजिटल हो गया है । सोशल मीडिया पर साझा की जा रही साहित्यिक रचनाएं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं । विचार गोष्ठी की अध्यक्षता प्रांतीय संरक्षक प्रो के ए वार्ष्णेय ने की । कार्यक्रम का संचालन विमलेश चंद्र दीक्षित ने किया ।

इस अवसर पर गुरविंदर सिंह, निर्भय सक्सेना, प्रमोद मिश्रा एवं प्रोफेसर डाॅ विनीता सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।

प्रोफेसर के ए वार्ष्णेय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सोशल मीडिया के विविध पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होने गोष्ठी में मौजूद साहित्यकारों से समाज को सकारात्मक संदेश देने बाले साहित्य के सृजन का अनुरोध किया। इस अवसर पर निरूपमा अग्रवाल, सरदार गुरविंदर सिंह, निर्भय सक्सेना, वी सी दीक्षित, रितेश साहनी, प्रमोद कुमार मिश्रा, डाॅ विनीता सिंह, अंशुमान सिंह आदि मौजूद रहे । गुरविंदर सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया । निर्भय सक्सेना

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