सिक्ख गुरू हरिराय के प्रकाश पुरब पर हुआ गुरमति समागम
बरेली रूबरू बरेली। गुरुद्वारा श्री गुरू सिंह सभा गुरू गोबिन्द सिंह नगर (माडल टाउन) में सिक्खों के सातवें गुरू साहिब गुरू हरिराय के पावन प्रकाश पुरब के अवसर पर विशेष गुरमति समागम में श्री दरबार साहिब अमृतसर साहिब से पंथ प्रसिद्ध रागी भाई कुलदीप सिंह ने विशेष रूप से पहुँच कर गुरबाणी कीर्तन कर संगत को अभिभूत कर दिया।
उन्होंने गुरू मर्यादा अनुसार कीर्तन की आरम्भता बसंत राग गायन किया, जिसमें उन्होंने शबद "आज हमारे ग्रह बसंत। गुन गाये प्रभ तुम बेअन्त" गायन किये। भाई नंदलाल द्वारा रचित काव्य से उन्होंने गुरू हरि राय जी के प्रकाश पुरब संबंधित ग़ज़ल
'हमू हसत हरिराय करता गुरू बद आशकारा हमा पुश्ते रू' गायन किया।
प्रोफेसर हरप्रीत सिंह ने गुरू हरि राय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरू हरिराय का जन्म फ़रवरी 1630 कीरतपुर साहिब में हुआ था। गुरु हरि राय के पिता का नाम बाबा गुरुदित्ता जी था और वह गुरु हरगोबिंद सिंह के पोते थे। गुरु हरि राय जी ने आध्यात्मिक नेतृत्व को आगे बढ़ाया और सिख समुदाय को एकजुट रखा।
गुरु हरि राय ने चिकित्सा और सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की। गुरु हरि राय जी ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया और पेड़ों के रोपण को बढ़ावा दिया। इससे पूर्व गुरद्वारा साहिब के हजूरी रागी भाई सतवंत सिंह ने शबद चौकी आरती के बाद बाणी सलोक महला 9 का गायन कर संगत को निहाल किया। अरदास हुकुमनामा के बाद समस्त संगत ने गुरू का लंगर छका एवं ग़ुरू का धन्यवाद किया।
संचालन मालिक सिंह ने किया। इस अवसर पर गुरदीपसिंह बग्गा, राजेंदर सिंह, अमरजीत बक्शी, लवली बक्शी, अमनदीप सिंह , मनदीप सिंह, राणा प्रताप सिंघ, विंकल,
दशमेश डिस्पेंसरी के मुखिया डॉक्टर जे. पी. सिंह सेठी ने बताया गुरुद्वारा साहिब द्वारा संचालित दशमेश डिस्पेंसरी के द्वितीय वर्ष पूर्ण होने पर कल (आज) एक निशुल्क मेडिकल हेल्थ कैंप सुबह 10 बजे से लगेगा। निर्भय सक्सेना
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