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हिन्दी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं बसंत गीत

हिन्दी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं बसंत गीत


बरेली रूबरू बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में साहित्य में बसन्त गीत पर गोष्ठी में कहा गया कि बसंत गीत और कविताएं पाठकों के मन को आनंद की अनुभूति से सराबोर कर देती हैं ।

विचार गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी ब्रज लोक कालोनी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में हुई गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि बसंत गीत और बसंत से जुड़ी कविताएं हिन्दी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।


बसंत ऋतु में धरती मानो हरियाली चादर ओढ़ लेती है । खेतों में चारो तरफ सरसों के पीले रंग के फूल खिल जाते हैं । वृक्ष नवीन पत्तियां धारण कर लेते हैं

आमों में मंजरियां आ जाती हैं । पूरा बातावरण असीम सुन्दरता से भर जाता है । प्रकृति की यह सुन्दरता साहित्यकारों को साहित्य सृजन के लिए प्रेरित करती है ।


विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव ओम शर्मा ने कहा कि हिन्दी साहित्य बसंत गीतों से भरा पड़ा है । हिन्दी के सभी प्रमुख कवियों ने बसंत की सुन्दरता पर अपनी लेखनी अवश्य चलाई है।


अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो के ए वार्ष्णेय ने कहा कि बसंत को ऋतुराज कहा जाता है। बसंत ऋतु में मौसम बहुत सुहावना हो जाता है । जय शंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पन्त, सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान आदि ने प्रकृति की सुन्दरता का सजीव चित्रण अपनी रचनाओं में किया है।


 इस अवसर पर उमेश चन्द्र गुप्ता, डाॅ अखिलेश कुमार गुप्ता,
डाॅ रवि प्रकाश शर्मा, निर्भय सक्सेना, प्रवीण कुमार शर्मा, रमेश रंजन, 
और ऋतेश साहनी ने अपने बसंत गीत और कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओ को रस विभोर कर दिया। वातावरण बसंत के मधुरिम वातावरण से ओत-प्रोत हो गया। 

अध्यक्षता प्रांतीय संरक्षक प्रो के ए वार्ष्णेय ने की । कार्यक्रम का संचालन विमलेश दीक्षित द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव ओम शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया । निर्भय सक्सेना

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