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सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम होती हैं लोक कलाएं

सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम होती हैं लोक कलाएं


बरेली रूबरू बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बैठक में 15 मार्च को नौझील, मथुरा में होने बाले ब्रज संस्कृति समागम समारोह की रुपरेखा बनाई गई।


बरिष्ठ साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल के प्रभात नगर स्थित आवास पर बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि लोक कलाएं सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम होती हैं । 


ग्रामीण अंचलों में प्रचलित पारम्परिक लोकगीत, लोकनृत्य और लोक कलाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से साहित्य परिषद ब्रज संस्कृति समागम करने जा रही है । 

इस समारोह में ब्रज क्षेत्र के क्षेत्र के विभिन्न जनपदों से आए लोक कलाकार अपनी - प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे । प्रतिभावान कलाकारों एवं साहित्यकारों को सम्मानित भी किया जाएगा।

प्रांतीय संरक्षक प्रोफेसर कृष्ण अवतार वार्ष्णेय ने बताया कि तीन सत्रों में होने बाले इस समारोह में लगभग 200 लोक कलाकार एवं साहित्यकार प्रतिभाग करेंगे । पहले सत्र में विचार गोष्ठी, दूसरे सत्र में ब्रज के लोक गीत एवं लोक नृत्य की प्रस्तुति होगी । तीसरे सत्र में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह होगा।

साहित्य परिषद के बरेली जनपद के अध्यक्ष डाॅ व्रजेश कुमार शर्मा ने कहा कि बरेली जनपद से 15 पदाधिकारी एवं साहित्यकार इस आयोजन में प्रतिभाग करेंगे । उन्होने बताया कि गंगाराम पाल और निरुपमा अग्रवाल के संयोजन मे बरेली के साहित्यकार सड़क मार्ग से नौझील मथुरा पहुंचेगे ।
  

बैठक की अध्यक्षता प्रांतीय संरक्षक प्रोफेसर कृष्ण अवतार वार्ष्णेय ने की । संचालन डाॅ व्रजेश कुमार शर्मा ने किया।


इस अवसर पर गंगाराम पाल, डाॅ रवि प्रकाश शर्मा, सरदार गुरविंदर सिंह, प्रवीण कुमार शर्मा, निर्भय सक्सेना, मोहन चन्द्र पाण्डेय, रितेश साहनी आदि मौजूद रहे । निर्भय सक्सेना

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