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तीर्थ यात्रा वनाम तीर्थ पर्यटन में अंतर के लिए आत्मचिंतन जरूरी:  निर्भय सक्सेना

तीर्थ यात्रा वनाम तीर्थ पर्यटन में अंतर के लिए आत्मचिंतन जरूरी: निर्भय सक्सेना



निर्भय सक्सेना, पत्रकार
बरेली रूबरू बरेली। अब आने वाले समय में देश की युवा पीढ़ी एवं नागरिकों को तीर्थ यात्रा और तीर्थ पर्यटन के बीच के अंतर को गंभीरता से समझना ही होगा बल्कि आत्मचिंतन भी करना होगा। 


कि हम तीर्थ यात्रा कर रहे हैं या तीर्थ पर्यटन। साथ ही शासन प्रशासन को भी हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थलों के आसपास गुटखा, सिगरेट, नशा, एवम मांस मदिरा के अलावा प्लास्टिक बोतल/पन्नी पर भी सख्ती से नियम बनाने होंगे। 


कुछ वर्ष पूर्व विश्वव्यापी कोरोना काल में हम सब बदली दिनचर्या को मजबूर हुए थे। पर समय बीतते ही उस दौर को इतनी जल्द हम सब भूल गए। आज युवा वर्ग का तीर्थ यात्रा के प्रति रुझान बढ़ रहा है। पर तीर्थ यात्रा में भी सिगरेट गुटखा की तलब से वह अपने को मुक्त नहीं कर पा रहा है। 


सावन माह में भी हम सब भोलेनाथ के भक्तो को धार्मिक यात्रा पर जाने से पूर्व ही अपनी नशे वाली कुछ आदतों में सख्ती से बदलाव लाना ही होगा तभी हम दूसरों के लिए भी आदर्श बन सकेंगे। कहा गया है जब "हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा" । 



कई राज्यों में एकल प्लास्टिक पर रोक लगाने की घोषणा भी हो गई हो। सुंदर हरे भरे पर्वतीय क्षेत्र आज भी पेय पदार्थो की खाली प्लास्टिक बोतल, टिन, ट्रेटरा पेक, कांच बोतलों एवं पन्नी से पटे पड़े हैं। जो हम सब के लिए दुखद ही है। 



केंद्र/राज्य सरकार पवित्र तीर्थ स्थलों अयोध्या, काशी, मथुरा, वैष्णो देवी, केदार नाथ, बद्री नाथ, पूर्णागिरी, भगवान वेंकटेश्वर के साथ ही अमरनाथ आदि के विकास में भी अरबो खरबों की भारी भरकम धनराशि खर्च कर रही है। 


जम्मू में अमरनाथ मार्ग पर भी पहाड़ों को काट कर कई सुरंग बन भी गई हैं। कुछ पर तेजी से कार्य चल भी रहा है। पर्यावरण संरक्षण पर हम सभी को भी जागरूक होना ही होगा। 


अमरनाथ मे बीते वर्ष 8 जुलाई 2022 को बादल फटने की आपदा हुई थी। हर वर्ष बाबा बर्फानी के कई लाख से अधिक भक्त दर्शन को आते हैं। इस वर्ष बाबा बर्फानी के 3 जुलाई 2026 से दर्शन प्रारंभ होंगे। 

जिसके रजिस्ट्रेशन चल रहे हैं । पर्वतीय एवम अन्य तीर्थस्थलो के आसपास नशीली वस्तुओं एवम पन्नी पर लगे रोक

भारत की केंद्र सरकार अब हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास पर जिस तेजी से कार्य कर रही है। उससे हिंदू समाज को तेजी से अब समझ आने लगा है की अब तक पूर्व की सरकारों ने देश की हिंदू बाहुल्य जनता के साथ भेदभाव कर उन्हें उपेक्षित ही रखा। 

अब आने वाले समय में देश के आस्थावान हिन्दू नागरिकों खासकर युवा पीढ़ी को तीर्थ यात्रा और तीर्थ पर्यटन के बीच के अंतर को भी गंभीरता से समझना ही होगा। 


साथ ही शासन प्रशासन को भी हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थलों के आसपास नशा एवम मांस मदिरा पर भी सख्ती करनी ही होगी। सरकार को पर्वतीय एवम अन्य तीर्थस्थलो के आसपास नशीली वस्तुओं, प्लास्टिक बोतल एवम पन्नी पर सख्ती से रोक लगानी ही चाहिए। 

इसके साथ ही जब "हम सुधरेंगे तो जग भी सुधरेगा"। कोविड काल को हम भारतीय इतनी जल्द भूल भी गए। बीते वर्षों में अमरनाथ यात्रा के दौरान बाबा बर्फानी यात्रा मार्ग में जब मैने बालटाल पर भी अंडा एवम सिगरेट गुटखा की खुली बिक्री होती दिखी। कुछ लोग तो दबी जवान में मदिरा की भी बिक्री की बात करते सुने गए। 

अमरनाथ यात्रा के दौरान हमारी बस जम्मू से चलकर जब बालटाल पहुंची तो सामने ही अंडा की ट्रे खुले आम लगी दिखीं थी। यह भी तर्क दिया गया कि घोड़े खच्चर, पालकी वाले वर्ग विशेष के है



उनके सेवन को ही अंडे बिक्री को रखे थे। हम सब कोरोना काल में बदली हुई दिनचर्या को इतनी जल्द भूल गए की कि तीर्थ यात्रा में भी सिगरेट गुटखा की तलब से अपने को मुक्त नहीं कर पा रहे हैं। हम सब भोले के भक्तो को धार्मिक यात्रा पर जाने से पूर्व ही अपनी नशे वाली कुछ आदतों में सख्ती से बदलाव लाना ही होगा तभी हम दूसरों के लिए भी आदर्श बन सकेंगे। 


धार्मिक आस्था में भी हम सब को ईमानदारी तो रखनी ही होगी। हम जब सावन नवरात्र में मांस, मदिरा, नशा का त्याग कर देते हैं तो तीर्थ यात्रा पर भी ऐसा आचरण हम सभी क्यों नहीं करते। हम क्यों प्लास्टिक टेट्रा पैक आदि का कचरा फेकते हैं ।



 अभी भी लोगो के लिए घोड़ा खच्चर पालकी से यात्रा के लिए वर्ग विशेष पर ही निर्भरता 

जम्मू कश्मीर के अमरनाथ यात्रा के पड़ाव बालटाल में है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ की वार्षिक यात्रा 3 जुलाई 2026 को अपने दोनों आधार शिविरों मध्य कश्मीर के गांदरबल में बालटाल मार्ग एवम दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में नुनवान - पहलगाम मार्ग से शुरू होनी है जो रक्षा बंधन के दिवस को यात्रा झंडी यात्रा के बाद समाप्त होती है।            


जम्मू से बालटाल तक का सफर, जो लगभग 400 किलोमीटर है। मार्ग में सुंदर घाटियों, झरनों और चारों तरफ हरियाली से होकर गुजरता है। बाबा बर्फानी के दर्शन करने आने वाले यात्रियों का नया अनुभव देता है। 


पवित्र गुफा के दर्शन के कारण इस रास्ते से सैनिकों की सतर्कता में गुजरते हुए हर तीर्थयात्री में उत्साह भी बढ़ जाता है। अब तो भारतीय रेलवे ने चिनाव नदी पर पुल बना दिया है। 


इस वर्ष 2026 में भारतीय रेल की बंदे भारत ट्रेन वैष्णो देवी से श्रीनगर के लिए भी शुरू हो गई है।
 


वर्तमान में भारत में नरेंद्र मोदी सरकार एवम जम्मू के राज्यपाल ने सैनिक अधिकारियो के साथ पूर्व में ही बैठक कर ऐसा सुरक्षा तंत्र विकसित किया है कि जगह जगह पर अब सैनिकों की तैनाती से सीमापर की आतंकी साजिशें सिर उठाने की हिम्मत भी नहीं कर सकेंगी। आतंकियों में आपरेशन सिंदूर से खौफ बना है । 

सभी हिंदू देवताओं में से भगवान भोलेनाथ शिव न केवल भारतीयों के बीच बल्कि अन्य देशों के लोगों के बीच भी लोकप्रिय हैं। 


परम पूज्य भगवान शंकर जी के करीब जाने के लिए, जो इस धरती पर एक बर्फ लिंगम के अनूठे रूप में अमरनाथ की पवित्र गुफा, जो 3880 मीटर की ऊंचाई पर है, में प्रकट होते हैं। 


लाखों भक्त हर साल जून जुलाई के महीनों में दक्षिण कश्मीर में स्थित श्री अमरनाथ जी तीर्थ के लिए कठिन पहाड़ों के माध्यम से भोलेनाथ के दर्शन करने इस पवित्र गुफा में जाते हैं। यहां भक्तो की देखभाल का प्रबंधन श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एस ए एस बी) द्वारा किया जाता है।


अभी भी अमरनाथ यात्रियों आदि लोगो के लिए घोड़ा खच्चर पालकी से यात्रा के लिए वर्ग विशेष मुस्लिम समाज पर ही निर्भरता बनी है। श्राइन बोर्ड ने अब उनके रेट भी तय कर दिए हैं। 


पूर्व में बालटाल बेस कैंप से ऊपर जाने के लिए घोड़ा वाले 4 से 5 हजार, पालकी वाले 10 से 15 हजार रुपए तक मांगते थे।                                                         
जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ की बाबा बर्फानी दर्शन यात्रा को लेकर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, इंडो तिब्बत बॉर्डर फोर्स, आदि अर्द्धसैनिक बलों की कंपनियों में शामिल लगभग 80 हजार से ऐक लाख तक संख्या में जवान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। 


सभी अर्धसैनिक कंपनियां भोले के भक्तो की सुरक्षित यात्रा के लिए जम्मू कश्मीर प्रदेश में पहुंची थी, जिनको यात्रा से पूर्व ही तैनात भी कर दिया गया था।


सौभाग्य वालों को हो मिलते है बाबा बर्फानी के दर्शन

बालटाल के बेस कैंप में चेकिंग के बाद से बाबाअमरनाथ की गुफा 16.5 किलोमीटर की जटिल यात्रा होती है। कहा जाता है भाग्यशाली लोगो को ही बाबा बर्फानी के दर्शन होते हैं। अधिक आयु वर्ग के भक्त लोगों को समस्या होने पर मार्ग में मेडिकल कैंप में ऑक्सीजन भी चेक कराना होता है। 


उन्हें ग्लूकोज का पानी भी पिलाया जाता है। मार्ग में बुराड़ी टॉप तक कठिन चढ़ाई है। उसके बाद बाबा बर्फानी के गुफा आने पर बाबा बर्फानी के दर्शन होते हैं । पूरे रास्ते में भोले के भक्तो के लिए लंगर की सुविधा रहती है। 


अमरनाथ यात्रा के लिए भारत में नरेंद्र मोदी सरकार एवम जम्मू के राज्यपाल ने सैनिक अधिकारियो के साथ पूर्व में ही बैठक कर ऐसा सुरक्षा तंत्र विकसित किया हुआ है कि जगह जगह पर अब सैनिकों की तैनाती से सीमापार की आतंकी साजिशें अब सिर उठाने की हिम्मत भी नहीं कर सकेंगी । 

उनमें आपरेशन सिंदूर का भी खौफ बना हुआ है ।


 

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