मुख्यमंत्री ग्रिड योजना में सड़कें सकरी एवं सुनहरे हवाई घोड़े से चौराहे हुए तंग।
मुख्यमंत्री योगी जी के दौरे से पूर्व फिर बन रही है वी आई पी कॉरिडोर बनाने की योजना।
एक छत के नीचे कब होंगे बरेली में बिजली, शिक्षा विभाग आदि सरकारी कार्यालय
निर्भय सक्सेना
बरेली रूबरू बरेली। बरेली स्मार्ट सिटी घोषित हुए कई वर्ष हो गए पर आज भी वाहन जिलाधिकारी की कोठी के आस पास ही सड़क पर दिन भर खड़े करने के लिए लोग मजबूर हैं।
हाइड्रोलिक वाहन पार्किंग अनुपयोगी होने से वह धूल फांक कर कंडम हो रही है। मुख्यमंत्री ग्रिड योजना में मॉडल टाउन/डी डी पुरम में कई मीटर चौड़े फुटपाथ होने से सड़के सकरी हो गईं। इन बन रही सड़को को भी नियम विरुद्ध होने से उनकी गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।
दामोदर स्वरूप पार्क के सामने सुनहरे हवाई घोड़े लगाकर सड़क और सकरी कर दी गई। वर्ष 2026 में भी बरेली स्मार्ट सिटी की कई योजनाएं पूरी होने के बाद भी कई बार के टेंडर होने के बाद भी उन्हें कोई भी लेने को आगे नहीं आ रहा जिससे उनके ऊपर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
सेटेलाइट पुल को वाई शेप में होने एवं रोडवेज बस अड्डे के कॉम्प्लेक्स बनने की योजना पर काम प्रस्तावित है।
दुर्घटना के बाद सेटेलाइट चौराहे पर यहां के नाले एवं अन्य नालों को ढकने की 500 करोड़ की योजना बना दी गई। अब इस मार्ग को वी वी आई पी कॉरिडोर बनाने की 115 करोड़ रुपए की योजना तैयार हुई हैं ।
जब सेटेलाइट पुल की विंग विश्व विद्यालय मार्ग पर उतरेगी और बस अड्डे का नया रूप होगा तो क्या इस चौराहे पर नाले के स्थान पर बड़े सीवर लाइन भी पड़ेगी ?।
बरेली में निर्माण योजनाओं में सरकारी विभागो का समन्वय अभाव से हर प्रोजेक्ट का टूटना या विलंबित होना दुखद होता जा रहा है। कई योजना जेल की लाइट एंड साउंड हो या डमरू चौक आदि की पूर्व में तोड़ी जाती रही हैं । स्मार्ट बरेली शहर में कही भी दो पहिया वाहन पार्किंग, कूड़ा निस्तारण का प्रोजेक्ट अभी तक पूर्ण नही होने का खमियाजा जनता को रोज भुगतना पड़ रहा है। बरेली में एक छत के नीचे बिजली, शिक्षा एवं अन्य सरकारी विभाग कब आयेंगे।
इसका जनता को अभी इंतजार है ।
बरेली में 22 किलोमीटर की दो रूट पर मेट्रो रेल चलाने को राइट्स की दोबारा बनी रिपोर्ट अभी भी प्रेजेन्टेशन के लिए राइट्स के पास ही पड़ी है। बरेली मेट्रो ट्रेन डिपो के लिए 20 हेक्टेयर जमीन का पेंच त्रिशूल हवाई अड्डे से अभी एन ओ सी नहीं मिलने से भी फंसा हुआ है।
इसके चलते सौ फुटा रोड टी पॉइंट का उपरगामी स्वीकृत भी अधर में लटक गया। कहीं यही हाल सेटेलाइट पुल के वाई शेप बनने में भी आड़े नहीं आ जाएं ।
अब तो यहां सेटेलाइट बस अड्डे का भी नए सिरे से विस्तार होना है। यही नाले में डूबने से एक राहगीर की मौत के बाद नाला को कबर करने की भी 500 करोड़ की योजना शासन को भेजी गई थी।
जब सेटेलाइट पुल का एक विंग इधर उतरेगा तो फिर नाला टूटने की बात हो सकती है। निर्माण योजनाओं में सरकारी विभागो का समन्वय अभाव से हर प्रोजेक्ट विलंबित होता है।
जिस पर जन प्रतिनिधि भी अधिकांश मोन ही रहते हैं। बरेली में रिंग रोड परियोजना भी कछुआ गति से रेंग रही है। सरकारी बिजली विभाग के बने हुए कार्यालयों वाली रामपुर बाग, कंपनी बाग, सर्किट हाउस के सामने अरबों खरबों रुपए की निष्प्रयोज्य जमीन पड़ी हुई है। अभी कुछ माह पूर्व वहां अग्नि कांड भी हुआ था। इससे पूर्व यही पर प्रदेश के मंत्री के कार्यक्रम में भूमिगत बिजली तार में फाल्ट पकड़ने वाली मशीन में भी धमाका हो चुका था।
कंपनी बाग पॉवर हाउस या रामपुर बाग की जमीन पर सर्वे कराकर शक्ति भवन की तर्ज पर बहुमंजिला भवन, भूमिगत पार्किंग के अलावा बहुमंजिला आवासीय टावर भी बनाने से एक छत के नीचे सभी बिजली कार्यालय आने से जनता को भी लाभ मिलेगा। साथ ही करोड़ों रुपए की राजस्व बचत भी हो सकती है।
इसी प्रकार कंपनी गार्डन के सामने सरकारी शिक्षा विभाग के अधिकारी के कार्यालय, काष्ठकला स्कूल का पुराना कार्यालय, बेसिक शिक्षा के कई विभाग, सुभाषनगर आदि वाले कार्यालय, राजकीय इंटर कालेज में माध्यमिक शिक्षा परिषद का कार्यालय, मनोविज्ञान केंद्र का पुराना कार्यालय पुराने होने के बाद भी कीमती जमीन पर बने हैं।
उन कार्यालय में भी काफी निष्प्रयोज्य भूमि भी पड़ी हुई है। इसी के पास राजकीय संकेत मूक बधिर एवं बचपन के भी सरकारी आवासीय विद्यालय हैं जो शिक्षक अभाव से जूझ रहे हैं।
रोजगार कार्यालय भी सदर तहसील के सामने बड़े भूखण्ड को घेरकर सरकारी धन का केवल रंगाई पुताई में खर्च कर रहा है । जनहित में बरेली विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जिला परिषद के भवन भी एक ही परिसर में ही होना चाहिये । साथ ही तीनों सरकारी एजेंसियों की समन्वय समिति भी प्रदेश के हर जिले में बनाई जाए ताकि तीनों सरकारी एजेंसियां आपसी तालमेल से जिले का सुनियोजित विकास कर सके।
स्मरण रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने बीते 1 अप्रैल 2025 को बरेली में समस्त सरकारी कार्यालय एक छत के नीचे लाने की बात कह कर अधिकारियों को निर्देश भी दिए थे। इस दिशा में अभी कोई पहल किसी भी सरकारी विभाग की ओर से अभी नहीं हो पाई है ।
अब जून 2026 के तीसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री जी का बरेली दौरा प्रस्तावित है । स्मरण रहे बरेली जैसे स्मार्ट सिटी में कुछ स्मार्ट अधिकारी बिना ठोस योजना के केवल सरकारी धनराशि ठिकाने लगाने की ही जोड़ तोड़ में लगे रहते है।
टीन का बना स्काई वॉक, स्टेशन रोड पर बहुमंजिला दुकानें (बिना पार्किंग), डेलापीर का सरोवर, संजय हाल वाला सरोवर, कथित फूड कोर्ट, संजय हाल एवं कंपनी बाग के बाहर में 15= 20 कार वाहन के लिए बना हाइड्रोलिक पार्किंग, लाइट एंड साउंड शो कई बार बनने के बाद स्थान बदलता रहा है जो आज बनने के कई वर्षों बाद भी प्रारंभ नहीं हो सके हैं।
पहले दिनेश जौहरी मार्ग नामकरण में रंगाई पुताई हुई। अब नाथ कॉरिडोर के नाम पर डिवाइडर कुछ ऊंचे हुए। बिना नाली बने अब टाइल्स का बिछवाना हो रहा है। रामलीला मैदान के साइड से हार्टमैन स्कूल जाने वाली सड़क को तारकोल से बना दिया गया।
दोनों साइड की नली नहीं बनी। अब दो माह बाद बरसात में जलभराव होने पर कोल्तार से बनी सड़क भगवान भरोसे होगी। अगर तहसील परिसर, जेल रोड, सब्जीमंडी कुतुबखाना सब्जी मंडी, श्यामगंज सब्जी मंडी, तिलक स्कूल, राजकीय इंटर कॉलेज के पास में अगर लख़नऊ के जनपथ, दिल्ली के कनॉट प्लेस की तर्ज पर अब खासकर दो पहिया वाहनों के लिए मल्टी स्टोरी पार्किंग और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सरकारी या पीपी मोड़ में बन जाये तो जनता को काफी राहत मिल सकती है सरकार को राजस्व भी मिलेगा।
इसके अलावा किला रेल क्रॉसिंग पर वाई शेप में नया पुल , डमरू चौक (डेलापीर) एवम सुभाषनगर में भी उपरगामी पुल बन जाने पर राहत मिलेगी। डेलापीर पर लगता है कि अब उपरिगामी पुल बनने की फ़ाइल भी कही दबी पड़ी होगी । बरेली स्मार्ट सिटी में बिजली आपूर्ति में काफी झोल हैं।
हल्की वर्षा या तेज हवा चलने पर घंटों बिजली जाना आम बात हो गई है। इस माह आई आंधी से बिजली विभाग हिल गया। पर मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश की सक्रियता, जागरूकता एवं टीम वर्क से बिजली आपूर्ति जल्द नार्मल हो गई।
इसी तरह पहले मंडल स्तर प्रदेश सूचना विभाग का कार्यालय, अत्याधुनिक कम्प्यूटर युक्त संकुल बने। जो प्रदेश के विकास कार्यों को आर्ट गैलरी के माध्यम से दर्शकों को दिखा सके। सूचना विभाग का प्रदेश के विकास कार्य का साहित्य वितरण कर सके। साथ ही सूचना संकुल में पत्रकारों के लिए प्रेस क्लब, निशुल्क पुस्तकालय भी खोल दिए जाये ताकि युवाओं में पुस्तक/ समाचार पत्र पढ़ने की रुचि विकसित हो।
ऐसे सूचना संकुल जिला स्तर पर भी क्रमबद्ध खोले दिए जाए। इसके लिए नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया ( nuji ), यू पी इकाई, लखनऊ के प्रदेश उपाध्यक्ष के नाते निर्भय सक्सेना ने मुख्यमंत्री जी को मेल/पत्र भेजकर काफी समय से इसकी मांग भी करते आ रहे है। निर्भय सक्सेना ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी मेरे जनहित के सुझावों पर ठोस कार्रवाई के संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की कृपा करेंगे। दामोदर स्वरूप पार्क के पास हवाई घोड़े लगाकर चोराहे को और सरका कर दिया गया।
अब तो किला के पुल के समानांतर एक वाई शेप पुल की भी बरेली को जरूरत है ।
निर्भय सक्सेना स्वतंत्र पत्रकार
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