बीडीए की सप्तनाथ ईको सिटी एवं विज्ञान पार्क, नक्षत्रशाला और कैनाल फ्रंट विकास पर विशेष जोर।
विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला- विज्ञान शिक्षा और नवाचार को मिलेगा प्रोत्साहन
बरेली रूबरू बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण बीडीए की विभिन्न प्रमुख विकास परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण करते हुए उनके उद्देश्यों, प्रस्तावित सुविधाओं एवं शहर के समग्र विकास में उनकी भूमिका से बोर्ड सदस्यों को अवगत कराया। इनमें इस सप्तनाथ इको सिटी योजना का लक्ष्य आधुनिक सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी आवासीय विकास के समन्वय से एक सुव्यवस्थित एवं नागरिक- केंद्रित शहरी क्षेत्र भी विकसित करना है।
बरेली विकास प्राधिकरण की 96वीं बोर्ड बैठक आयुक्त एवं बोर्ड अध्यक्ष शंभू कुमार की अध्यक्षता में हुई जिसमें बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री सौम्या पांडेय ने परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों को रखा और बोर्ड द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया।
इनमें सप्तनाथ ईको सिटी को बरेली के भविष्य के सुनियोजित विस्तार की प्रमुख परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया। पीलीभीत बाईपास क्षेत्र में लगभग 267.14 हेक्टेयर भूमि पर 11 सेक्टरों में प्रस्तावित इस योजना में कुल 4,726 आवासीय भूखंडों के साथ विभिन्न आवासीय एवं शहरी सुविधाओं के विकास की परिकल्पना की गई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप योजना में समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ई डब्लू एस) एवं निम्न आय वर्ग (एल आई जी) के लिए आवासों का विकास भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य सुनियोजित शहरी विस्तार के साथ जरूरतमंद एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना है।
इस योजना के अंतर्गत आवासीय भूखंडों, ग्रुप हाउसिंग, ईडब्लूएस एवं एलआईजी आवासों, व्यावसायिक क्षेत्रों, पार्कों, हरित क्षेत्रों तथा सार्वजनिक एवं अर्द्ध- सार्वजनिक सुविधाओं का समन्वित विकास प्रस्तावित है। साथ ही सड़क नेटवर्क, जलापूर्ति, सीवरेज, विद्युत एवं अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।
बरेली की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान ‘नाथ नगरी’ को ध्यान में रखते हुए योजना में थीम आधारित हरित क्षेत्र, आकर्षक लैंडस्केपिंग, पार्क एवं ब्लू- ग्रीन कॉरिडोर जैसी अवधारणाओं को भी शामिल किया गया है। इस योजना का लक्ष्य आधुनिक सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी आवासीय विकास के समन्वय से एक सुव्यवस्थित एवं नागरिक- केंद्रित शहरी क्षेत्र विकसित करना है।
रामगंगा नगर के सेक्टर- 8 में प्रस्तावित विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला बरेली में विज्ञान शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है।
परियोजना में लगभग 12 मीटर व्यास वाले डिजिटल प्लैनेटोरियम डोम की परिकल्पना की गई है। इसके माध्यम से दर्शक तारामंडल, ग्रहों, आकाशगंगाओं तथा ब्रह्मांड की विभिन्न घटनाओं का आकर्षक और अनुभवात्मक दृश्य-प्रदर्शन देख सकेंगे।
विज्ञान पार्क में छह विषयगत दीर्घाओं के माध्यम से अंतरिक्ष एवं ब्रह्मांड, भू- विज्ञान, जीवन के विकास, भारतीय वैज्ञानिक परंपरा, जलवायु तथा पर्यावरण जैसे विषयों को रोचक एवं संवादात्मक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। यह केंद्र विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने तथा विज्ञान को सरल एवं अनुभवात्मक रूप में समझने का अवसर प्रदान करेगा।
ग्रेटर बरेली क्षेत्र में कैनाल फ्रंट विकास के अंतर्गत नहर के दोनों ओर हरित पट्टियों, पार्कों और लैंडस्केपिंग के विकास की योजना प्रस्तुत की गई। प्रस्तावित सुविधाओं में पैदल भ्रमण पथ, बैठने की व्यवस्था, पौधरोपण, प्रकाश व्यवस्था तथा नागरिकों के लिए खुले एवं सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थान शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य नहर के आसपास के क्षेत्र को अधिक आकर्षक, स्वच्छ एवं जनोपयोगी बनाना तथा शहर में हरित क्षेत्रों और नागरिकों के लिए खुले स्थानों को बढ़ावा देना है।
लालपुर एवं अढलखिया क्षेत्र में प्रस्तावित ओमैक्स इंटीग्रेटेड टाउनशिप में आवासीय, व्यावसायिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध- सार्वजनिक उपयोगों के साथ हरित क्षेत्रों और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के समन्वित विकास की परिकल्पना की गई है।
योजना का उद्देश्य सुनियोजित विकास के माध्यम से आधुनिक शहरी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है
बरेली विकास प्राधिकरण की यह विकास परियोजनाएँ शहर में आवासीय सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास, पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक स्थलों के निर्माण तथा विज्ञान एवं शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेष रूप से सप्तनाथ ईको सिटी का विकास समावेशी शहरी नियोजन की अवधारणा को साकार करने में सहायक होगा। इन पहलों के माध्यम से बरेली को अधिक सुव्यवस्थित, आधुनिक, हरित एवं नागरिक-केंद्रित शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। निर्भय सक्सेना
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