लाल बहादुर शास्त्री से मिलकर जे.बी.सुमन हुए गदगद: निर्भय सक्सेना
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने मेरे कंधें पर हाथ रखकर कहा तुम जिस क्षेत्र में भी कार्य करो। ईमानदारी से ही कार्य करना कोई समस्या हो तो निसंकोच आकर हमसे मिलना। इतना कहकर श्री लाल बहादुर शास्त्री ने पत्नी श्रीमती ललिता शास्त्री की ओर इंगित करते हुए कहा कि यह कुन्दन के बेटे हैं यह पारिवारिक मिलन जे. बी. सुमन के जेहन में हमेशा तरोताजा रहा।
'दैनिक दिव्य प्रकाश' के प्रधान संपादक जे.बी. सुमन ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से दिल्ली प्रधानमंत्री आवास पर अपनी मुलाकात के बारे में बताते हुए कहा था कि दिसंबर 1965 के प्रथम पखवाड़े में मैं किसी कार्य से दिल्ली गया था। सोचा प्रधानमंत्री से ही मिल लूं।
मैं दिन में लगभग 11 बजे प्रधानमंत्री के निवास स्थित कार्यालय पहुंच गया। रिसेप्शन पर पर्ची दी। बताया मैं इलाहाबाद से आया हूं। पर्ची लेने वाले अधिकारी ने पूछा कि क्या शास्त्री जी आपको जानते हैं ।मैंने डरते हुए हामी भर दी। उस समय एक जर्मन शिष्टमंडल प्रधानमंत्री से भेंट कर रहा था। कुछ समय बाद ही मुझे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कमरे में बुलवा लिया। कार्यालय का स्टाफ अचंभित था इतनी जल्दी प्रधानमंत्री ने इस युवक को कैसे बुलवा लिया।
मैं स्वयं आश्चर्यचकित व अचंभित था। कार्यालय के सहायक के पीछे ही मैं भी उनके कमरे में दाखिल हो गया। मैंने पहले तो प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के पांव छुये और अपना परिचय देते हुए कहा कि आपके इलाहाबाद स्थित मकान से सटा मकान मेरे नानाजी जालपा प्रसाद का है। मैं उन्हीं की बेटी कुंदन देवी का पुत्र हूं। मेरे पिता का नाम ब्रज बहादुर है। शास्त्री जी ने मुझे गले लगाया।
मैंने बरेली से निकल रही पत्रिका ‘कुमुदनी’ उन्हें भेंट की और कहा कि बरेली में कानून की पढ़ाई के साथ ही अब पत्रकारिता क्षेत्र में भी भाग्य आजमा रहा हूं। उन्होंने हमारे परिवार की कुशल क्षेम पूछी। लगभग बीस मिनट उनके साथ रहा। फिर वह मुझे कार्यालय के पास में ही अपने आवास ले गये। वहां श्रीमती ललिता शास्त्री जी से परिचय कराते हुए कहा कि यह युवक इलाहाबाद मैं यह अपने पड़ोसी कुंदन का बेटा हैं।
श्रीमती ललिता शास्त्री जी का आशीर्वाद लेकर मैं बहुत गदगद था। बरेली लौटने के बाद प्रधानमंत्री शास्त्री जी से मुलाकात की बात जे.बी.सुमन ने जब अपने पत्रकार साथियों का बताई तब उन्हें यह विश्वास ही नहीं हुआ।
इसके बाद डाक से जब मुझे शास्त्री जी के साथ खिंचवाया गया फोटो मिला तो मैंने अपने साथियों को वह फोटो दिखाया तब उन सबको यकीन करना ही पड़ा। इस भेंट के लगभग एक पखवाड़े के बाद ही लाल बहादुर शास्त्री जी की ताशकन्द (रूस) में जनवरी में मृत्यु हो गई।
श्री सुमन ने कहा कि शास्त्री जी की मौत से मुझे काफी सदमा लगा। उत्तर प्रदेश में ऊर्जा मंत्री रहे स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी के पुत्र सुनील शास्त्री जी से मैंने अपनी भेंट का जिक्र किया तो उन्हें भी स्मरण हो आया कि उस समय वह भी वहां उपस्थित थे। इसके बाद सुनील शास्त्री फर्राशी टोला में स्थापित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा देखने भी गए थे।
सुनील शास्त्री ने कहा कि पिता जी हमेशा सत्य की राह पर चलने का वचन भी मुझसे लिया था। बरेली में प्रेमनगर में दिव्य प्रकाश जाने वाली रोड का नाम जे.बी.सुमन के पिता व मां का नाम पर ही ब्रजकुंदन मार्ग के नाम से जाना जाता है। जे.बी.सुमन को चोधरी चरण सिंह का भी आशीर्वाद प्राप्त था। देश में जब 1974 में आपातकाल लगा तो चोधरी चरण सिंह बरेली में ही आये।
उन्हें जे.बी.सुमन ने गुप्त स्थान पर ठहराया। उस समय निर्भय सक्सेना, अनुराग दीपक ने भी इस कार्य में उनकी मदद की। चोधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से जे.बी.सुमन ने बरेली शहर विधानभा का चुनाव भी लड़ा जिसमें उन्हें पराजय मिली थी। वर्तमान में स्वर्गीय जगदीश बहादुर सुमन उर्फ जे. बी. सुमन के पुत्र प्रशांत सुमन अब 'दैनिक दिव्य प्रकाश' अखबार का संपादन कर रहे हैं।
निर्भय सक्सेना वरिष्ठ पत्रकार बरेली
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