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बरेली में होली की रामबारात में हुरियारों का रहता है अलग अंदाज। लंबे पीतल के हैंडपम्प से जगह जगह खेला जाता है मोर्चा

बरेली में होली की रामबारात में हुरियारों का रहता है अलग अंदाज। लंबे पीतल के हैंडपम्प से जगह जगह खेला जाता है मोर्चा


निर्भय सक्सेना              
बरेली रूबरू बरेली। स्मार्ट सिटी बरेली में यूनेस्को सूची में दर्ज 166 वर्ष से होने वाली होली वाली रामलीला इस बार भी 25 फरवरी 2026 को पताका यात्रा के बाद से निरंतर चल रही है । 

अब मेट्रो शहरों में होली का हुड़दंग भले ही आजकल कम हो गया हो पर अपने स्मार्ट सिटी बरेली में होली हुड़दंग के लिए हुरियारों अपने बड़े पीतल वाले लंबे हैंड पम्प निकाल कर उनमें तेल पानी के साथ ही उनकी मरम्मत भी दुकानों पर करा रहे हैं।  

इस बार भी 166 वर्ष पुरानी बमनपुरी की होली की रंग बारात 2 मार्च 2026 को ग्रहण के कारण रामलीला कमेटी शहर में उत्साह के साथ निकालने को तैयार है।                            

बरेली शहर की कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, की कई दुकानों पर बड़े बड़े पीतल के लंबे हैंडपम्प बिक्री भी चल रही है।  जहाँ तक बरेली की आउटर कालोनियों की बात की जाए  तो वहां होली का उत्साह अब सिमटता ही जा रहा है वहां होली उत्सव गुलाल तक ही सिमट रहा है। 

परंतु बमनपुरी, बिहारीपुर, चाहबाई, बजरिया पूरनमल, कालीबाड़ी, सिकलापुर,  श्यामगंज, आलमगिरी गंज, बड़ा बाजार जैसे घनी आबादी वाले एरिया में होली पर 2 मार्च 2026 को निकलने वाली रंगबारात में हुरियारों में खूब उत्साह अभी से ही है । 

हिन्दू सोशल ट्रस्ट के गुलाबराय में लगने वाला 'होली मिलन समारोह' भी बरेली का ऐतिहासिक होता है जिसमे सभी राजनेतिक, सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के स्टाल लगते हैं। 


दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोग अपने नव निर्वाचित विधायकों से गले मिले।  सभी को शुभकामनाएं भी दीं। जिसमे जिले के अधिकांश विधायक, सांसद, मंत्रीगण,  जिले के प्रमुख प्रशानिक/ पुलिस अधिकारी, व्यापारी नेता, डॉक्टर, समाजसेवी आदि शामिल रहते हैं। बरेली शहर में होली दहन वाले अधिकांश स्थानों पर हर बार की भांति गोबर लेपन के बाद पेड़ो की टहनियां का ढेर लग गए है। कालीबाड़ी, सिकलापुर, गंगापुर, पुराना शहर, चाहबाई, गुलाबनगर, बिहारीपुर, बमनपुरी, मढ़ीनाथ, सुभाषनगर प्रेमनगर, राजेन्द्र नगर में एसे दृश्य होली पूर्व  से दिखने लगते है। 

बमनपुरी, चाहबाई की रंगबारात के आयोजकगण  2 मार्च को ध्यान रख तैयारी की है।                                             


श्री राम लीला सभा बमनपुरी की रामबारात ( होली की रंगबारात) पिछले 166 वर्ष से निरंतर निकलती रही है। जिसमे चाहबाई से निकलने वाली रंगबारात ( भगवान नरसिंह की शोभायात्रा) भी कुतुबखाना पर मिल कर पूरे शहर में भृमण कर अपने अपने गंतव्य पर समाप्त होती है। 

जिसमे ट्रैक्टर ट्रॉली, बैल ठेलो पर बड़े बड़े ड्रम में भरे पानी से हुरियारे रास्ते भर मोर्चा खेलते, रंग गुलाल उड़ाते चलते हैं। हर हुरियारे अपने अलग अंदाज में रंगा पुता नजर आते हैं। 

ब्रह्मपुरी से निकले वाली  रंग बारात बिहारीपुर, कुतुबखाना, अस्पताल रोड, कोतवाली, बरेली कॉलेज रोड, कालीबाड़ी, श्यामगंज, आलमगीरी गंज बड़ा बाजार में बड़े ड्रम, कड़ाव रख कर हुरियारे मोर्चा खेलते है। इस रंग बारात का अलग अंदाज होता है।                  

स्मरण रहे इस बार बमनपुरी श्री रामलीला सभा की 166 वीं होली की रामलीला के लिए 25 फरवरी 2026  को बमनपुरी में पूजन के बाद झंडी यात्रा निकाली गई थी। अध्यक्ष राजू डिश  वाले, सुनील रस्तोगी, राज कुमार गुप्ता, सर्वेश रस्तोगी, विशाल मेहरोत्रा,  दिनेश दद्दा, विवेक जी, अंशु सक्सेना,  प्रदीप सिंह के साथ ही  पंकज मिश्रा, नीरज रस्तोगी, विवेक शर्मा, गौरव सक्सेना, इंद्र देव त्रिवेदी, जनार्दन आचार्य, निर्भय सक्सेना, महेश पंडित, अभिनव कटरु, प्रवीन उपाध्याय आदि ने भाग लिया।

होली पर ही कमल टाकीज परिसर में आल इंडिया कल्चरल एसोसिएशन के बैनर पर कबीर पुरस्कार विजेता जे सी पालीवाल जी के निवास पर 'महामूर्ख सम्मेलन' भी रंगबारात वाले दिन ही हुआ करता  था। पालीवाल जी के निधन के बाद इस बार भी 33 वीं बार 27 फरवरी 2026 को उपजा प्रेस क्लब में हुआ ।

जिसमे मूर्खाधिराज की उपाधि दी गई । समाजसेवी श्री जे सी स्वर्गीय जे सी पालीवाल ने इसे वर्ष 1990 में इस महामूर्ख सम्मेलन शुरू कराया गया था। अब उनके निधन के बाद इस बार भी महामूर्ख सम्मेलन उपजा प्रेस क्लब में 27 फरवरी 2026 को हुआ जिसमें रोहित राकेश को महा मूर्ख, टिंकू जी, रणधीर प्रसाद गौड़ आदि को मूर्ख की उपाधि दी गई।

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