Bareilly news: जिला हॉस्पिटल बरेली में बहुमंजिला भवन निर्माण कर एक छत के नीचे हो सभी मेडिकल सेवाएं। बांसमंडी का सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज भी जिला परिषद रोड वाली साइड में शिफ्ट किया जाए
निर्भय सक्सेना
बरेली रूबरू बरेली। दो भाग में बंटे हुए जिला हॉस्पिटल बरेली में दोनों साइड में महिला हॉस्पिटल की तर्ज पर बहुमंजिला भवन निर्माण कर एक छत के नीचे सभी सेवाएं होने से जनता को राहत मिलेगी।
साथ ही बांसमंडी का आयुर्वेदिक कॉलेज भी जिला परिषद रोड वाली साइड में शिफ्ट किया जाए तो जनता को भी लाभ होगा।
इसके साथ ही महाराणा प्रताप मूर्ति स्थल को भी हरियाली युक्त पार्क में तैयार किया जाए। जिला अस्पताल के दोनों गेट को नई सड़क मार्ग से यू शेप का आने जाने का मार्ग बना दिया जाए।
अस्पताल में बने सभी प्रशासनिक कार्यालय पुराने गिरताऊ भवन एवं आवास जिला परिषद वाली साइड में शिफ्ट होने से इस परिसर में भूमिगत वाहन पार्किंग की भी भरपूर जगह उपलब्ध हो सकेगी।
बरेली बीजेपी का गढ़ रहने के बावजूद सरकारी चिकित्सा क्षेत्र में अभी भी जिला बरेली काफी पिछड़ा हुआ ही है।
बरेली एकमात्र जिला है जहां सरकारी मेडिकल कॉलेज तक नहीं है। 300 बेड हॉस्पिटल भी अव्यस्था एवं डॉक्टरों के अभाव में सफेद हाथी बना हुआ है ।
उत्तर प्रदेश में बरेली जिला में अभी तक सरकारी मेडिकल कॉलेज तक नही खुल सका है । बिना लाभकारी योजना के बना यूनानी कॉलेज सफेद हाथी बना हुआ है । एम्स की वर्षो पुरानी मांग फाइल में दबी पड़ी है।
पत्रकार निर्भय सक्सेना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी को मेल भेजकर बरेली की जनता को सरकारी चिकित्सा की बेहतर सेवा देने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज, एम्स जैसा हॉस्पिटल देने की मांग की है।
साथ ही एक छत के नीचे मेडिकल सेवाएं लाने की भी मांग जनहित में उठाई है । स्मरण रहे उत्तर प्रदेश में बी जे पी का गढ़ बरेली रहा है। जहां बी जे पी के वर्तमान में 1 सांसद, 7 विधायक, 2 एम एल सी, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष बीजेपी के दूसरे कार्यकाल में भी हैं। खेद के साथ कहना पड़ रहा ही कि आम जनता को सरकारी मेडिकल सेवा देने में बरेली जिला अभी काफी पीछे है।
जिसका कारण यहां निजी मेडिकल कॉलेज को राजनीतिक जीवनदान देने से इलाज महंगा होता चला गया।
स्मरण रहे बरेली ही एक मात्र ऐसा जिला है जहां 75 वर्ष बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेज अभी तक नही खुल सका है। सरकारी यूनानी कॉलेज को हजियापुर में जगह ही मिली है पर हॉस्पिटल अभी सफेद हाथी की तरह खड़ा हुआ है कब शुरू होगा पता नहीं। बांस मंडी का आयुर्वेदिक कॉलेज बिना कैम्पस के एक दरबे में सिमटा पड़ा है।
अपने भेजे मेल मे निर्भय सक्सेना ने कहा ही की मेरा विनम्र सुझाव है की जिला हॉस्पिटल के टी बी हॉस्पिटल एवम उससे सटे पुराने गिरताऊ भवन तोड़कर उस बड़े परिसर में 100 बेड का एक नया आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, कार्यालय, आवास परिसर एवं जिला हॉस्पिटल परिसर में बनी दुकानों का भी मल्टी स्टोरी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाए।
ताकि बरेली की घनी आबादी को आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ शहर के बीच ही पूर्ववत मिलता रहे । राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की प्रधानचार्य का कहना है कि आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए शहर में ही नया भवन बने।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्वीकारा कि जिला हॉस्पिटल का परिसर बेहतर विकल्प हो सकता है । बिथरी से बीजेपी विधायक डॉ राघवेंद्र शर्मा 15 किलोमीटर दूर इसे रामगंगा के पास बने स्कूल में शिफ्ट करने की मांग कर चुके है जो एक अदूरदर्शितापूर्ण कदम होगा।
पर सुना है उसकी पत्रावली रेंगने भी लगी है। बीजेपी विधायक संजीव अग्रवाल भी कहते हैं कि आयुर्वेदिक हॉस्पिटल को अपने विधानसभा एरिया में ही नया भवन दिलाने के लिए उनका प्रयास होगा। निर्भय सक्सेना
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