Bareilly news: कलम बरेली की पार्ट-6" में मुखरित होते हैं बरेली की सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं सामाजिक चेतना के स्वर
बरेली रूबरू बरेली निर्भय सक्सेना बरेली के जाने-माने पत्रकार हैं। वह निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में नए- नए प्रतिमान गढ़े हैं।
अब वह साहित्य के क्षेत्र में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
बरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना ने बरेली नगर की ऐतिहासिक बिरासत और बरेली के वर्तमान बिकसित परिवेश को अपने साहित्यिक लेखन का केंद्र बनाया है।
विगत कई वर्षों से पूरी तल्लीनता के साथ अपने लेखन कार्य में संलग्न हैं। अपनी साहित्य यात्रा के दौरान उनकी पांच पुस्तकें ‘कलम बरेली की पार्ट -1’ , 'कलम बरेली की पार्ट' -2 , ' कलम बरेली की पार्ट- 3 , कलम बरेली की पार्ट - 4 ' और ' कलम बरेली की पार्ट - 5 ' प्रकाशित हो चुकी हैं ।
उनकी यह कृतियां पाठकों के मध्य बहुत लोकप्रिय और चर्चित रही हैं । निर्भय सक्सेना की इन कृतियों की लोकप्रियता बरेली जनपद की सीमाओं को पार कर प्रदेश ही नहीं देश में जा पहुंची है।
कहते हैं कि पाठकों की मुक्त कंठ से की गई प्रशंसा साहित्यकार के लिए बूस्टर डोज का काम करती है। यह बात निर्भय सक्सेना पर पूरी तरह लागू होती है।
अपनी कृतियों की सफलता से उत्साहित होकर वे अपनी अगली नवीन कृति के लेखन कार्य में पूरी तल्लीनता के साथ जुट गए। उनकी सद्यः प्रकाशित उनकी साहित्य लेखन के प्रति इसी निस्वार्थ समर्पण का प्रतिफल है ।
अब उनकी नवीन कृति -'कलम बरेली की-6' प्रकाशित हो चुकी है और पाठकों के मध्य खासी लोकप्रियता हासिल कर रही है। '
कलम बरेली की-6' में बरेली की समृद्ध सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक चेतना के स्वर मुखरित हैं । इसमें बरेली के तत्कालीन समाज का प्रतिबिम्ब स्पष्ट रूप से झलकता है। यह पुस्तक बरेली का एक ऐतिहासिक दस्तावेज है और हमें इसमें बरेली की समृद्ध सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत की झलक मिलती है।
निर्भय सक्सेना बरेली के एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने अपने लेखन कार्य का केन्द्र बिन्दु बरेली को बनाया है। उनकी यह नवीन कृति-' कलम बरेली की पार्ट-6 'उन शोध छात्रों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी जो बरेली की सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं साहित्यिक गतिविधियों पर शोध करना चाहते हैं। इसके साथ ही इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को बरेली की अतीत की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक विरासत की सही एवं सटीक जानकारी मिल सकेगी।
बरेली की साहित्यिक गतिविधियों का सटीक विश्लेषण इस पुस्तक में किया गया है। जनपद के साहित्यिक सरोकार शीर्षक से समाहित लेख में बरेली के साहित्यकारों का विशद वर्णन किया गया है। इस लेख से ज्ञात होता है कि पंडित राधेश्याम कथा वाचक, निरंकार देव सेवक, पंडित नाथू लाल अग्निहोत्री नम्र, पंडित राम नारायन पाठक, वसीम बरेलवी, किशन सरोज, वीरेन डगवाल, सुकेश साहनी, खालिद जावेद तथा डा. इन्दिरा आचार्य आदि ने बरेली में साहित्य की अलख जगाई। इन साहित्यकारों ने साहित्य के क्षेत्र में पूरे देश में बरेली को अपनी अलग पहचान दिलाई।
निर्भय सक्सेना कहते हैं कि वर्तमान समय में साहित्य भूषण सुरेश बाबू मिश्रा, भगवान शरण भारद्वाज, सुधीर विद्यार्थी, आचार्य देवेन्द्र देव, रणधीर प्रसाद गौड़, रमेश विकट, हरीशंकर सक्सेना, निर्मला सिंह, रमेश गौतम, डाॅ. एन.एल. शर्मा, शिवशंकर यजुर्वेदी, कमल सक्सेना, राहुल अवस्थी, पूनम सेवक, रोहित राकेश, आनन्द गौतम, डाॅ. दीपांकर गुप्त, डाॅ. अवनीश यादव, निरुपमा अग्रवाल, शराफत अली खान, नितिन सेठी आदि साहित्य की कीर्ति पताका पूरे देश में फहरा रहे हैं। इसके साथ वे कई नवोदित साहित्यकारों का भी उल्लेख करते हैं।
‘कलम बरेली की-6’ में लेखक बरेली के राजनीतिक परिदृश्य का वर्णन भी बड़ी बेवाकी के साथ करते है। लेखक के अनुसार श्री बृजराज सिंह उर्फ आछू बाबू, धर्मदत्त वैद्य, पी. सी. आजाद, राम सिंह खन्ना, राजवीर सिंह, कुँवर सुभाष पटेल, डॉ श्याम बिहारी लाल, केसर सिंह, सन्तोष कुमार गंगवार, राजेश अग्रवाल, सर्वराज सिंह, सुमन लता सिंह, प्रवीन सिंह ऐरन, सुप्रिया एरन आदि ने बरेली में राजनीति के परचम को फहराया। वर्तमान समय में डाॅ. अरुण कुमार, मेयर उमेश गौतम, धर्मेन्द्र कश्यप, संजीव अग्रवाल, डॉ राघवेंद्र शर्मा, महाराज सिंह, बहोरन लाल मौर्य, आदि बरेली की राजनीति के सिरमौर हैं।
लेखक बरेली में पत्रकारिता के परिदृश्य को रेखांकित करते हुए कहता है कि आजादी के पूर्व से ही बरेली - हिन्दी, उर्दू के साप्ताहिक एवं पाक्षिक समाचार-पत्रों का एक प्रमुख केन्द्र रहा है। इन समाचार-पत्रों ने रुहेलखण्ड में आजादी की अलख जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वर्तमान समय में बरेली से अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, जनमोर्चा, दिव्य प्रकाश, अमृत विचार का प्रकाशन हो रहा है। डिजिटल न्यूज पेपर रूप में गम्भीर न्यूज, टेलीग्राम एवं रुहेलखण्ड पोस्ट भी पाठकों के मध्य काफी लोकप्रिय है। मुंशी प्रेम नारायण सक्सेना, राकेश कोहरवाल, ज्ञान सागर वर्मा, नरेश वर्मा, राम गोपाल शर्मा, सुरेश शर्मा, राम दयाल भार्गव, बृजपाल बिसरिया,विनोद भसीन, आशीष अग्रवाल, नूतन सक्सेना, शंकर दास, जनार्दन आचार्य, डॉ पवन सक्सेना, सुभाष चोधरी, मनवीर सिंह, अनूप मिश्रा, संजीव कुमार शर्मा गम्भीर, सुनील सक्सेना, निर्भय सक्सेना, राजीव शर्मा, प्रशांत रायजादा, मुकेश तिवारी, गोपाल विनोदी आदि की गणना बरेली के प्रमुख पत्रकारों में की जाती रही है।
इस प्रकार प्रस्तुत कृति के अनुसार वर्तमान परिवेश में बरेली में प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों का भविष्य उज्जवल है।
लेखक के अनुसार बरेली को चित्रांश समाज की विभूतियों ने राजनीति, समाज सेवा, शिक्षा, चिकित्सा तथा वकालत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
चित्रांश समाज के प्रमुख व्यक्तियों के रूप में वे डाॅ. अरुण कुमार सक्सेना, पी. सी. आजाद, अनिल कुमार सक्सेना, किशोर कटरू, शिवकुमार वरतरिया, संजीव सक्सेना, सुरेन्द्र बीनू सिन्हा तथा राजेन विद्यार्थी आदि का उल्लेख करते हैं।
वह कहते हैं कि बरेली निवासी प्रेम बिहारी रायजादा ने तत्कालीन राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद के अनुरोध पर भारतीय संविधान की पहली प्रति अपने हाथ से लिखी थी। वे कहते हैं कि चित्रांश समाज ने आजादी के आन्दोलन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पी. सी. आजाद तथा बाबूराम सक्सेना का वह प्रमुख रूप से उल्लेख करते हैं। वे कहते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूराम सक्सेना एवं कृपा देवी ने स्वतंत्रता के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली पेंशन लेने से इनकार कर दिया था।
इस प्रकार ‘कलम बरेली की-6’ अपने आप में बरेली के तत्कालीन समाज के विविध आयामों को समेटे हुए है।
बरेली पर शोध करने वाले शोध छात्रों के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी सिद्ध होगी ऐसा मेरा मानना है। इस कृति की व्यापक विषय वस्तु हेतु मैं निर्भय सक्सेना को साधुवाद देता हूँ और कृति की सफलता की कामना करता हूँ। मेरी कामना है कि निर्भय सक्सेना की लेखनी इसी प्रकार निरंतर अवाध रूप से चलती रहे और उनकी नई - नई कृतियां पढ़ने को मिलती रहें। सुरेश बाबू मिश्रा साहित्य भूषण
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