ओजोन परत के घटते आकार से पिघल रहे ग्लेशियर
बरेली रूबरू बरेली। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रांत बरेली के तत्वावधान में विचार गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा रहे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डाॅ एस पी मौर्य ने कहा कि हमें ए सी और रेफ्रिजरेटर के प्रयोग में कटौती करने के प्रयास करने होंगे । पृथ्वी पर अधिक से अधिक बृक्ष लगाकर हम ओजोन परत का संरक्षण कर सकते हैं।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि ओजोन परत वायुमण्डल की एक महत्वपूर्ण परत है । ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों की ऊष्मा के एक बड़े भाग को सोख लेती है । यदि ओजोन परत नहीं हो और सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आ जाएं तो कुछ ही दिनों में पूरी पृथ्वी पिघल कर लावा बन जाएगी ।
इसलिए ओजोन परत को धरती की छतरी कहा जाता है। उन्होने बताया कि रेफ्रिजरेटर और ए सी से निकलने बाली फ्लोरो क्लोरो कार्बन गैसों के कारण ओजोन परत का आकार निरन्तर घट रहा है जिसके परिणाम स्वरूप धरती का तापमान तेजी से बढ़ रहा है । पिछले दस बर्षों में धरती के तापमान में 30 डिग्री सेंटी ग्रेड की रिकॉर्ड बृद्धि हुई है।
धरती के बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं । नेपाल में हुई भयावह तबाही का मुख्य कारण तिब्बत स्थित ग्लेशियर फटने से नदी में आई भीषण बाढ़ थी । अगर हम इसी प्रकार प्रकति के साथ लगातार छेड़-छाड़ करते रहे तो एक दिन सम्पूर्ण मानवता का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा ।
जनपदीय अध्यक्ष डाॅ ब्रजेश कुमार शर्मा, निरुपमा अग्रवाल, डॉ अखिलेश कुमार गुप्ता, विमलेश चन्द्र दीक्षित एवं प्रोफेसर विनीता सिंह ने भी ओजोन परत के संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए ।
गोष्ठी में मोहन चंद्र पांडे, गंगाराम पाल, विमलेश चन्द्र दीक्षित, कुलदीप वर्मा, अनिल शर्मा, प्रमोद मिश्रा, संजीव शंखधार, गुरविंदर सिंह, महेंद्र पाल राही, रितेश साहनी एवं अंशुमान सिसोदिया मौजूद रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्र डाॅ एस पी मौर्य ने की । संचालन निरुपमा अग्रवाल ने एवं विमलेश चन्द्र दीक्षित ने सभी का आभार व्यक्त किया । निर्भय सक्सेना
0 Response to "ओजोन परत के घटते आकार से पिघल रहे ग्लेशियर"
एक टिप्पणी भेजें