संतोष गंगवार का चाणक्य दांव सफल, श्रुति गंगवार पहुंचीं राज्यसभा
निर्भय सक्सेना
बरेली रूबरू बरेली। बीजेपी की राजनीति में एवं सरकार में लंबी पारी खेलने के बाद अपनी राजनीतिक विरासत को अपने राजनीतिक बेटे बेटियों को सौंपने में गिने चुने लोग ही सफल हो पाते हैं।
खासकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में ऐसे उदाहरण कम ही है। जबकि देश की सत्ता पर 70 साल काबिज रही कांग्रेस में तो हर नेता ने अपने परिवार को ही आगे बढ़ाया।
उत्तर प्रदेश की बीजेपी की बात की जाए तो राज्यसभा की ताजा सूची में बीजेपी के आठ बार के सांसद रहे कद्दावर नेता रहे अब झारखंड के राज्यपाल माननीय संतोष कुमार गंगवार की पुत्री श्रुति गंगवार का नाम देख कर सभी अचंभित हो गए। पर बीजेपी आलाकमान ने श्रुति गंगवार को आठवें प्रत्याशी के रूप में लाकर एक तीर से कई निशाने लगाने की कोशिश की थी जिसमें वह सफल भी रही।
समाजवादी पार्टी का आलाकमान भी श्रुति गंगवार का सूची में आठवां नाम देखकर अपना तीसरा प्रत्याशी उतारने की हिम्मत नहीं जुटा सका। चुनाव नहीं होने से इस तरह अब सभी के निर्विरोध राज्यसभा में जाने का मार्ग पक्का हो गया।
बरेली में कुछ नेता विधायक बनने/बिगड़ने का अंक गणित ही जोड़ने में ही लगे रहे। और श्रुति गंगवार उर्फ बुलबुल अब सीधे देश के उच्च सदन राज्यसभा में 6 वर्ष के लिए पहुंच गईं। और कोई बड़ी बात नहीं कि नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में पहली बार में ही अपनी योग्यता पर मंत्री पद भी पा जाएं।
बीते लोकसभा चुनाव में जब संतोष कुमार गंगवार को टिकट नहीं मिला था तो उनसे कुछ नाराज लोगों ने मान लिया कि उन का राजनीतिक कैरियर समाप्ति की ओर है । बरेली सीट से छत्रपाल गंगवार बीजेपी के सांसद बने।
कई नेता भारत सेवा ट्रस्ट से पाला बदल कर नए सांसद के या अन्य खेमे में जा बैठें। भारत सेवा ट्रस्ट पर आवाजाही भी कम हो गई। मुझे स्मरण है जिस दिन नरेंद्र मोदी जी के मंत्रिमंडल में विभाग का वितरण हो रहा था। भारत सेवा ट्रस्ट के कार्यालय पर टीवी के सामने माननीय संतोष गंगवार जी के साथ कुछ ही गिने चुने आधा दर्जन लोग ही रात्रि में शांत बैठकर प्रसारण देख रहे थे।
उनमें ऐक मैं भी था। जब संतोष कुमार गंगवार को झारखंड में राज्यपाल के रूप में नया दायित्व मिला तो उनके काफिले ने दिखा दिया कि बरेली मंडल में टाइगर अभी जिंदा है। सादगी से बिना काफिले के मोटर साइकिल से शहर में भ्रमण करने वाले आठ बार के सांसद/ मंत्री के काफिला देख कर कई राजनीतिक लोग हैरान रह गए। बाद में संतोष कुमार गंगवार ने अपने पुत्र के विवाह में हुए कई जगह हुए समारोह में राजनीति/ उद्योग जगत की हस्तियों को बुलाकर राजनीतिक जगत अपनी मजबूत पकड़ दर्शा दी थी कि वह अभी भी सरल तो हैं पर बरेली मंडल ही नहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीति के चाणक्य ही है ।
बरेली के राजनीतिक गलियारे में अर्बन कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड की चेयर पर्सन श्रुति गंगवार कई साल से विधान सभा चुनाव के लिये अपनी जमीन कई कुर्मी बाहुल्य सीटों पर तैयार कर रही थी। कई लोग चर्चा कर रहे थे कि संतोष गंगवार के राज्यपाल होने के बाद उनके परिवार को बीजेपी कैसे और क्यों टिकट देगी।
पर इस सब से बिना विचलित हुए श्रुति गंगवार गांव शहर के हर कार्यक्रम में जाकर अपना स्थान बनाने को परिश्रम में लगी रहीं। अब राज्यसभा जाने का रास्ता साफ होने के बाद श्रुति गंगवार आधी आबादी के बीच से उभरा ऐसा प्रखर चेहरा हैं, जिनको राजनीति दिग्गज पिता संतोष गंगवार से विरासत में अवश्य मिली है। श्रुति गंगवार ने पढ़ाई से लेकर स्टार्टअप खडा करने तक अपना हौसला कायम रखा।
चौधरी तालाब निवासी संतोष गंगवार एवं मां सौभाग्य गंगवार के घर 25 दिसंबर 1977 को जन्मी श्रुति गंगवार ने आई आई टी रुड़की से कैमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। आई आई एम बेंगलुरु में भी अध्ययन किया है।
नामी आईटी कंपनी इन्फोसिस से करियर की शुरुआत की और देश- विदेश में कई प्रोजेक्ट पर सफलता से काम किया है। वर्ष 2012 में स्वावलबन दिशा में कदम बढ़ाते हुए बेंगलुरु से खुद का एडटेक स्टार्टअप शुरू किया। 2016 में आईटी सर्विस के क्षेत्र में नोएडा में कंपनी की शुरुआत की।
वर्तमान में अर्बन कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड बरेली की चेयरपर्सन हैं। कानपुर के सुबोध सचान से उनका विवाह हुआ। सुबोध सचान भी आई आई टी रुड़की से पास आउट इंजीनियर हैं ।
श्रुति गंगवार भारत सेवा ट्रस्ट के माध्यम से मोतियाबिंद कैंप लगा कर हजारों गरीबों का नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिन्द इलाज मुफ्त करवा चुकी हैं। बरेली लोकसभा सीट से 8 बार सांसद और कई बार केंद्रीय मंत्री रहे अब झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से ही उनकी बेटी श्रुति गंगवार ने राजनीति की हर विधा सीखी है।
अभी तक बरेली की राजनीति में वह जिले की बहेड़ी, नवाबगंज और भोजीपुरा विधानसभा में सक्रिय थीं। अब श्रुति गंगवार की केन्द्रीय राजनीति में एंट्री बरेली मंडल ही नहीं आसपास के जिलों में कुर्मी बहुल जिलों मैं भी अपना राजनीतिक प्रभाव छोड़ेगी। कोई बड़ी बात नहीं कि उन्हें मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में स्थान भी मिल जाएगा।
क्योंकि आधी आबादी के लिए मंत्रिमंडल में स्थान रिक्त भी हैं । पूर्व सांसद स्वर्गीय राजवीर सिंह के पुत्र धीरेंद्र सिंह ने किस्सा बताया और उसे अपनी वाल पर भी लिखा। तीन चार साल पहले एक बड़े नेता से दिल्ली पर उनकी कोठी पर जाकर मिलने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ था लेकिन भीड़ के कारण शायद वह नेता जी ध्यान नहीं दे पाए।
मै भी वापिस आ गया। बाद में उन्हें ध्यान आया तो उन्होंने मुझे फोन किया अगले दिन मै फिर से उनसे मिलने गया। काम तो कोई नहीं था सिर्फ दर्शन करना था। सुबह उन्होंने मुझे एकांत में ले जाकर मुझसे बात की तो मैने उनसे सिर्फ एक ही बात की अगर आपको अपनी लेगेसी ट्रांसफर करनी है तो अपने सामने ही कर जाएं वरना बाद में बहुत धक्के खाने पड़ेंगे और शायद उन्होंने मेरी बात पर गंभीरता से विचार किया।
राजनीति में यदि परिवारवाद की परंपरा को निभाना है तो अपने सामने ही अपनी संतति को स्थापित करना शुभकर रहता है। और जो संघर्षों के बल पर आगे बढ़ते है वह परिवार वाद के दायरे में नहीं आते। बरेली में परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की बात हो तो उसमें गिने चुने नाम ही सामने आते हैं ।
बरेली केंट विधान सभा से कांग्रेस के अशफाक अहमद, उनके बेटे इस्लाम साबिर,उनके बेटे शहजिल इस्लाम, अशफाक के भाई रफीक अहमद रफ़न, प्रदेश सरकार में कांग्रेस के पूर्व मंत्री धर्म दत्त वैद्य एवं उनके बेटे भूपेंद्र नाथ शर्मा, पूर्व मंत्री रहे कांग्रेस के ओम प्रकाश सिंह की पुत्री सुमन लता सिंह ( बीजेपी), कांग्रेस के पूर्व सांसद/ विधायक प्रवीण सिंह की पत्नी सुप्रिया एरन ( मेयर), पूर्व विधायक/ मेयर स्वर्गीय सुभाष पटेल की पुत्र वधु रश्मि पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष, केसर सिंह की परिवार की ऊषा गंगवार, जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व विधायक स्वर्गीय बीरेन्द्र सिंह परिवार की नीरू पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष आदि के ही नाम हैं।
आजकल पूर्व सांसद/विधायक सर्वराज सिंह के पुत्र सिद्ध राज सिंह, बीजेपी में पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय डॉ दिनेश जौहरी के पुत्र राहुल जौहरी, बीजेपी के सांसद रहे कद्दावर नेता ठाकुर राजबीर सिंह के पुत्र धीरेंद्र राजवीर सिंह, विधायक स्वर्गीय केसर सिंह के पुत्र विशाल गंगवार, स्वर्गीय कुंवर सुभाष पटेल पूर्व विधायक /मेयर के पुत्र प्रशांत पटेल, उमेश गौतम मेयर के पुत्र पार्थ गौतम, प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे भानु प्रताप सिंह की पुत्री तेजेश्वरी सिंह, कांग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री चेतराम गंगवार के पौत्र भुजेंद, पूर्व सांसद कल्याण सिंह की पुत्री लता सिंह भी बीजेपी टिकट की मिलने की मन में इच्छा रखकर अपने अपने राजनीतिक आकाओ के दरबार में विधान सभा चुनाव टिकट के लिये हाजिरी लगा रहे थे।
2027 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी उन्हीं जमीनी संघर्षशील प्रत्याशियों पर फोकस करेगी जो अपने दम पर भी अन्य बिरादरी 10 से 15 हजार का वोट लाने की ताकत रखते हों।चुनाव में जीत के लिये मेहनत के साथ भाग्य भी काफी मायने रखता है ।
निर्भय सक्सेना यू पी शासन से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार
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