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बरेली। माँ जानकी प्राकट्य, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार प्रसंग ने भावविभोर किए श्रद्धालु

बरेली। माँ जानकी प्राकट्य, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार प्रसंग ने भावविभोर किए श्रद्धालु


बरेली रूबरू बरेली। चौधरी मोहल्ला स्थित श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक 459वीं श्रीरामलीला के अंतर्गत चौधरी तालाब रामलीला मैदान में प्रभु श्रीराम की लीलाओं का भव्य एवं मनमोहक मंचन किया गया। मंचन में माँ जानकी के प्राकट्य, महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का वध तथा माता अहिल्या उद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया।

लीला की शुरुआत मिथिला में पड़े भीषण अकाल के दौरान राजा जनक द्वारा भूमि जोतने और धरती से कलश के रूप में माँ जानकी के प्राकट्य के अलौकिक दृश्य से हुई। इसके बाद असुरों के अत्याचार से पीड़ित ऋषि-मुनियों के यज्ञ की रक्षा के लिए महर्षि विश्वामित्र द्वारा अयोध्या से प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का प्रसंग दिखाया गया। वन में राक्षसी ताड़का के आतंक का अंत करते हुए प्रभु श्रीराम ने उसका वध किया तथा सुबाहु और मारीच को परास्त कर महर्षि का यज्ञ सफल कराया।

मंचन के अगले प्रसंग में जनकपुर जाते समय प्रभु श्रीराम द्वारा अपने चरणों की धूलि से पाषाण बनी माता अहिल्या का उद्धार दिखाया गया। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा।

समिति के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्रा ने कहा कि माँ जानकी का प्राकट्य और अहिल्या उद्धार जैसे प्रसंग भक्ति, आस्था और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश देते हैं। वहीं महाप्रबंधक श्रेयांश बाजपेई ने बताया कि रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिनके लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं।
समिति के मंत्री शशिकांत गौतम ने बताया कि अगले दिन जनकपुरी की भव्यता, पुष्प वाटिका, लक्ष्मण-परशुराम संवाद एवं सीता स्वयंवर (धनुष यज्ञ) का आकर्षक मंचन किया जाएगा।
इस अवसर पर घनश्याम मिश्रा, विजय मिश्रा, शिव नारायण दीक्षित, धीरेंद्र शुक्ला, अभिषेक मिश्रा, आदित्य शुक्ला, यश चौधरी, हर्ष अग्रवाल, आकाश गंगवार एवं मीडिया प्रभारी समर्थ गौतम सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने व्यास पीठ की महाआरती कर प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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