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होली आदि त्यौहार वाली मिली जुली संस्कृति से भारत और अधिक मजबूत। साहित्य परिषद के कार्यक्रम में कलम बरेली की - 6 का हुआ विमोचन

होली आदि त्यौहार वाली मिली जुली संस्कृति से भारत और अधिक मजबूत। साहित्य परिषद के कार्यक्रम में कलम बरेली की - 6 का हुआ विमोचन




बरेली रूबरू बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रान्त, बरेली के तत्वावधान में होली गीत कार्यक्रम में साहित्यकार रंजीत पांचाले ने कहा कि पूर्व में सोवियत संघ जैसा मजबूत देश कई हिस्सों में बंट गया था पर भारतीय संस्कृति के होली आदि जैसे पर्व एवं त्यौहार वाली मिली जुली संस्कृति के कारण भारत देश और अधिक मजबूत हुआ।


इस अवसर पर निर्भय सक्सेना की पुस्तक कलम बरेली की- 6 का विमोचन हुआ। साहित्य परिषद की प्रांतीय संगठन मंत्री निरुपमा अग्रवाल के प्रभात नगर स्थित आवास पर हुए कार्यक्रम में प्रोफेसर के ए वार्ष्णेय, साहित्य भूषण सुरेश बाबू मिश्रा, उमेश चन्द्र गुप्ता, निरुपमा अग्रवाल, डाॅ रणजीत पांचाले, डाॅ ब्रजेश कुमार शर्मा, उमेश त्रिगुणायत अद्भुत, शिव ओम शर्मा, हिमांशु श्रोत्रिय, अनुराग उपाध्याय, उपमेन्द्र सक्सेना, प्रवीण कुमार शर्मा, श्रीमती मधुरिमा ने होली पर्व पर अपने विचार रख गीत एवं कविता सुनाई। 

निर्भय सक्सेना की कृति - कलम बरेली की- 6 का विमोचन अवसर पर इसे एक महत्वपूर्ण कृति बताया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य परिषद ब्रज प्रान्त के प्रांतीय संरक्षक प्रो कृष्ण अवतार वार्ष्णेय एवं संचालन साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल ने किया । 

इससे पूर्व मोहन चन्द्र पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती बंदना से होली गीत कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । उमेश चन्द्र गुप्ता, डाॅ ब्रजेश कुमार शर्मा, अनिल कुमार शर्मा, प्रमोद मिश्रा, डाॅ अखिलेश कुमार गुप्ता, प्रवीण कुमार शर्मा, हिमांशु श्रोत्रिय, उमेश त्रिगुणायत अद्भुत, निरुपमा अग्रवाल, उपमेंद्र सक्सेना, मोहन चन्द्र पाण्डेय, रितेश साहनी, रमेश रंजन, अंकित गुप्ता अंक और डाॅ रवि प्रकाश शर्मा ने अपने मधुर कंठ से मनमोहक होली गीत प्रस्तुत कर पूरे बातावरण को होली के उल्लास से ओत-प्रोत कर दिया ।


इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि बरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना की पुस्तक कलम बरेली की - 6 बरेली की सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक ,साहित्यिक और धार्मिक गतिविधियों का एक सुरम्य गुलदस्ता है । 


इसमें बरेली का प्रतिबिम्ब झलकता है । उनकी यह कृति साहित्य की एक अनमोल धरोहर है । साहित्यकार डाॅ रणजीत पांचाले ने भारतीय संस्कृति में होली पर्व की महत्ता पर बिस्तार से प्रकाश डाला । 


उन्होने कहा कि कृति कलम बरेली की- 6 शोध छात्रों और भावी पीढ़ी के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी । अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर के ए वार्ष्णेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति उत्सवधर्मी है । सनातन संस्कृति में पर्व एवं त्योहारों की लम्बी परम्परा है। कार्यक्रम के अंत में प्रांतीय संचार मन्त्री डाॅ अखिलेश कुमार गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया । निर्भय सक्सेना

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