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किला रेल क्रासिंग पर रामपुर रोड तक नया लंबा उपरगामी वाई शेप पुल शीघ्र बने सुभाष नगर एवम डेलापीर पर उपरिगामी पुल भी जरूरी

किला रेल क्रासिंग पर रामपुर रोड तक नया लंबा उपरगामी वाई शेप पुल शीघ्र बने सुभाष नगर एवम डेलापीर पर उपरिगामी पुल भी जरूरी

               
बरेली रूबरू बरेली। स्मार्ट सिटी बरेली में अब किला रेल क्रासिंग पर रामपुर रोड तक लंबा नया वाई शेप पुल का निर्माण शीघ्र किया जाना बहुत जरूरी हैं ताकि अगले कुछ वर्ष बाद नया पुल बन कर धरातल पर आ सके।                


स्मरण रहे रेलवे लाइन किला उपरगामी पुल पर कुछ वर्ष पूर्व कई करोड़ रुपए खर्च कर रंगाई पुताई के साथ बिना पेड़ो की जड़ों को नष्ट किए और बिना मार्ग प्रकाश के लगभग 40 वर्ष पुराने किला रेल पुल को स्वर्गीय सत्य प्रकाश अग्रवाल सेतु नाम देकर शुरू करा दिया गया। बताया गया कि उसकी आयु 5 साल और बढ़ गई थी।


पर समय रहते इस लाइफलाइन का विकल्प नहीं तलाश गया जिसके चलते बीते दिनों 381.1 मिली मीटर की रिकॉर्ड वर्षा ने किला रेल पुल की भी कलई खोल दी सड़क उधड़ गई जो मरम्मत को फिर बंद हो गई। अब किला क्रासिंग पर रामपुर रोड तक लंबा वाई शेप पुल शीघ्र बनाया जाना बहुत जरूरी हैं जो अलखनाथ मंदिर मार्ग पर भी उसकी विंग उतर सके  ।                                

बरेली में कुछ माह पूर्व अब झारखंड के राज्यपाल,  केंद्र सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवम पूर्व सांसद संतोष कुमार गंगवार, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने रेलवे अधिकारियो के साथ शमशान भूमि के प्रस्तावित अंडर पास पर स्थलीय दौरा कर मंत्रणा भी की थी। पर उस अंदर पास की प्रगति अभी धरातल पर नहीं आ पाई है।       


                    

अब आवश्यकता इस बात की भी है कि किला के नए रेल पुल की बाई  शेप डिजाइन इस प्रकार बनाई जाए की उसका एक सिरा सिटी रेलवे स्टेशन से उठ कर किला बाकरगंज होकर रामपुर दिल्ली रोड पर और दूसरा सिरा अलखनाथ मार्ग की रेल लाइन को पार कर इज्जतनगर रोड की ओर बनाया जाए। यही नहीं उस पुल की एक विंग सिटी शमशान घाट या मढ़ीनाथ मार्ग पर भी उतारी जाए।           


स्मरण रहे बरेली में रामपुर रोड को जोड़ने वाला लगभग वर्षो पूर्व बना किला पुल बिना पथ प्रकाश कई खामियों के साथ कई माह बाद सत्य प्रकाश सेतु के रूप में 6 अप्रेल 2023 को शुरू हो गया था जो अब फिर बदहाल हो चुका है। पर इस पुल की आयु कितनी होगी यह उसकी मरम्मत के  लिए आए करोड़ों के  बजट को ठिकाने लगाकर और खामियां छोड़ने से ही पता चलता है।

                             

देश में एक और तेजी से राजमार्ग, उपरिगामी पुल, अंडरपास का जाल बिछाया जा रहा है ताकि मार्ग यातायात में  सुगमता बनी रहे। पर अपने बरेली मंडल की बात की जाए तो यहां आज भी कुतुबखाना महादेव पुल निर्माण का वाई शेप डिजाइन भी नहीं बना है। 


आई वी आर आई मार्ग पुल की डिजाइन भी ऐसा जटिल बनाया गया की वह यातायात की सुगमता की बजाए जनता को दिग्भर्मित अधिक करता है।   इसके अलावा अब तो महेशपुर रेलवे क्रॉसिंग पुल बनाने की भी फाइल खुल चुकी है। पर सुभाष नगर उपरिगामी पुल की फाइल अभी ठंडे बस्ते में ही पड़ी है क्योंकि उससे रेलवे को कोई लाभ नहीं है।                          

पत्रकार निर्भय सक्सेना ने किला पर एक लंबा पुल स्मार्ट सिटी योजना में बनबाने के लिए मुख्यमंत्री से मेल/पत्र भेजकर मांग भी की थी। इसके साथ ही प्रस्तावित डेलापीर पुल के निर्माण के लिए जुलाई 2013 से कई पत्र पूर्व केंद्रीय मंत्री पूर्व सांसद संतोष कुमार गंगवार, डॉ अरुण कुमार वन मंत्री से भिजवाए थे। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी जून 2016 पर डाला जिसका नंबर 11150160069643 था जिसे तत्कालीन प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अनीता सिंह ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को 24 जून 2016 को प्रेषित किया था। अब कई वर्ष बाद शासन प्रशासन को इसकी 2022 में याद आई है।                                      


आज भी चौपला रेल पुल दिन में कई बार जाम का कारण बनता हैं। सुभाष नगर का प्रस्तावित उपरिगामी पुल का भी कई बार से नेताओं का आश्वासन ही मिल रहा है। क्योंकि इससे रेलवे  को कोई फायदा नही है इसलिए ही वह पुल रूपी गेंद लोनिवि या राज्य सरकार की ओर वापस कर देता है। रेलवे  अधिकारी अपनी जमीन को ही बचाने में लगे हुए हैं। 

बदायूं रोड पर करगेना में महेशपुरा रेल क्रॉसिंग पर भी पुल इसलिए जरूरी है की आजकल इस रोड पर ही कई कालोनी का विस्तार भी हो रहा है। अब एक बार फिर से महेशपुर रेल उपरिगामी पुल की फाइल बाहर आ चुकी है। अगर बदायूं रोड से ही मढ़ीनाथ या सिटी शमशान मार्ग पर पुल बनाकर जोड़ने की पहल बीजेपी के विधायक सरकार से कर दें तो एक बहुत बड़ी यातायात की समस्या हल हो सकेगी।                                                                             


 बरेली में पुराने चौपला क्रॉसिंग, किला रेल क्रासिंग पर अंडरपास की आज बहुत अधिक जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि जिला परिषद, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन एवम जनप्रतिनिधियों की एक कोआर्डिनेशन कमेटी बने 


जनप्रतिनिधि भी रेल मंत्रालय से पुल की फाइल की गति बढ़ने में दिलचस्पी भी लें तभी यह कार्य संभव होगा। इसके लिए पत्रकार निर्भय सक्सेना ने पूर्व में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी को मेल भेज कर हर जिले के नियोजित विकास के लिए यह सुझाव दिया था।    


                               


स्मार्ट सिटी बरेली में अब  मेट्रो के मार्ग का विकास प्राधिकरण एवम राइट्स की संयुक्त टीम बीते दिनो सर्वे भी कर चुकी है।                            

बरेली शहर में वाहन पार्किंग समस्या विकराल बनी हुई है। सपा के सभासद राजेश अग्रवाल भी कई बार अधिकारियों का ध्यान इंगित भी करा चुके हैं।                                           

पूर्व मेयर डॉ आई इस तोमर ने पूर्व में पत्रकारों से कहा था कि जब तक जिला परिषद रोड पर कुतुबखाना महादेव पुल की रोड नहीं उतरेगी यह कुतुबखाना पुल बेमानी ही साबित होगा। जिला परिषद रोड पर भी कुतुबखाना पुल की एक विंग उतारी जानी चाहिए।                 


वाहन पार्किंग मोतीपार्क में  बनने से मोतीपार्क का ऐतिहासिक स्वरूप ही नष्ट हो गया है जहां देश के बड़े नेताओं की आम सभा होती थीं।   
स्मार्ट सिटी में अभी कुतुबखाना सब्जीमंडी में बहुमंजिला वाहन पार्किंग की कोई जगह या योजना भी नही चिन्हित हुई है। लखनऊ के हजरतगंज के जनपथ की तर्ज पर बहुमंजिला वाहन पार्किंग एवम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनने से कुतुबखाना के पुल से  व्यापारियों को भी आसानी होगी।                        निर्भय सक्सेना, पत्रकार                           मोबाइल 9411005249 ,  8077710362

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