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पर्वतीय समाज की रामलीला में दिखेगी संस्कृति, संस्कार एवं नई पीढ़ी की प्रतिभा

पर्वतीय समाज की रामलीला में दिखेगी संस्कृति, संस्कार एवं नई पीढ़ी की प्रतिभा


बरेली रूबरू बरेली। पिछले 59 वर्ष से निरंतर होनें वाली पर्वतीय समाज की 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक होने वाली इस वर्ष की 60 वीं रामलीला में धर्म, संस्कृति, संस्कार और नई पीढ़ी की प्रतिभा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।


पर्वतीय समाज की रामलीला के मंचन को इस बार विशेष रूप देने की तैयारी की जा रही है। भगवान श्रीराम और माता सीता के आदर्शों को केंद्र में रखते हुए पर्वतीय समाज की संस्कृति एवं परंपराओं की झलक भी मंच पर दिखाई देगी।


इस बार की रामलीला की सबसे खास और उल्लेखनीय बात यह है कि स्थानीय बच्चों के साथ- साथ लड़कियों ने भी बढ़- चढ़कर भागीदारी की है। विभिन्न पात्रों के रूप में लड़कियां भी रामलीला मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। 


इससे रामलीला में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिलेगा। बच्चों और लड़कियों की इस भागीदारी से यह संदेश भी जाएगा कि प्रतिभा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होती बल्कि अवसर मिलने पर हर बच्चा अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है।
पर्वतीय समाज के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दियोलिया ने कहा कि इस बार की 60 वीं रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस बार स्थानीय बच्चों के साथ लड़कियों की भागीदारी विशेष रूप से उत्साहवर्धक है।


समाज के महासचिव डॉ. नरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि बच्चों और युवाओं को रामलीला से जोड़ने का उद्देश्य उन्हें भगवान श्रीराम के आदर्शों के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि लड़कियों का उत्साहपूर्वक आगे आना आयोजन की विशेष उपलब्धि है।


पर्वतीय समाज के वरिष्ठ सलाहकार कुंवर सिंह बिष्ट ने कहा कि रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय बच्चों और बेटियों की सक्रिय भागीदारी से इस बार की रामलीला और भी जीवंत एवं प्रेरणादायी बनेगी।


वहीं समाज के निदेशक उमेश बिनवाल एवं आनंद सिंह मेहता ने कहा कि स्थानीय बच्चों और लड़कियों ने रामलीला के लिए जिस उत्साह और मेहनत के साथ तैयारी की है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस बार मंचन में पर्वतीय लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय प्रतिभाओं को विशेष स्थान दिया गया है।


आयोजकों के अनुसार रामलीला के विभिन्न प्रसंगों में श्रीराम के आदर्श, माता सीता का साहस एवं त्याग, लक्ष्मण की निष्ठा और हनुमान जी की भक्ति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।


स्थानीय बच्चों और विशेष रूप से बेटियों की सक्रिय भागीदारी इस रामलीला को एक नया स्वरूप दे रही है। धर्म और संस्कृति के साथ प्रतिभा, सहभागिता और नई पीढ़ी का यह संगम इस वर्ष की रामलीला 14 अक्टूबर 2026 से 21 अक्टूबर 2026 तक विशेष बनाने जा रहा है। 

रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतले का दहन 20 अक्टूबर 2026 को होने वाले मुख्य आकर्षण भव्य दशहरे मेले में होगा। जो दोपहर 02 बजे से आरंभ होकर देर रात्रि तक चलेगा जिसमें आतिशबाजी भी करी जाएगी। निर्भय सक्सेना

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